क्रमकः। पदकः। शिक्षकः। मीमांसकः।
इति रक्ताद्यर्थकाः॥४६॥
.....
१०५५- क्रमादिभ्यो बुन्। क्रमः आदिर्येषां ते क्रमादयस्तेभ्यः। क्रमादिभ्यः पञ्चम्यन्तं, बुन् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। तदधीते तद्वेद मूल का पूरा अनुवर्तन है। प्रत्ययः, परश्च, इत्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार है।
द्वितीयान्त समर्थ क्रम आदि प्रातिपदिकों से 'पढ़ता है' अथवा 'जानता है' अर्थों में बुन् प्रत्यय होता है।
नकार की इत्संज्ञा होती है, बु बचता है। उसके स्थान पर युवोरनाकौ से अक आदेश हो जाता है।
क्रमकः। वैदिक क्रम पाठ को पढ़ने वाला या जानने वाला। क्रमम् अधीते अथवा
.....
क्रमं वेद। क्रम अम् में क्रमादिभ्यो वुन् से वुन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके क्रम+वु बना। युवोरनाकौ से वु के स्थान पर अक आदेश होकर क्रम+अक बना। यस्येति च से मकारोत्तरवर्ती अकार का लोप करके वर्णसम्मेलन होकर क्रमक बना। स्वादिकार्य करके क्रमकः सिद्ध हुआ।
पदकः। वैदिक पद पाठ को पढ़ने वाला या जानने वाला। पदम् अधीते अथवा पदं वेद। पद अम् में क्रमादिभ्यो वुन् से वुन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके पद+वु बना। युवोरनाकौ से वु के स्थान पर अक आदेश होकर पद+अक बना। यस्येति च से दकारोत्तरवर्ती अकार का लोप करके वर्णसम्मेलन होकर पदक बना। स्वादिकार्य करके पदकः सिद्ध हुआ।
शिक्षकः। शिक्षा ग्रन्थ को पढ़ने वाला या जानने वाला। शिक्षाम् अधीते अथवा शिक्षां वेद। शिक्षा अम् में क्रमादिभ्यो वुन् से वुन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके शिक्षा+वु बना। युवोरनाकौ से वु के स्थान पर अक आदेश होकर शिक्षा+अक बना। यस्येति च से क्षा के उत्तरवर्ती आकार का लोप करके वर्णसम्मेलन होकर शिक्षक बना। स्वादिकार्य करके शिक्षकः सिद्ध हुआ।
मीमांसकः। मीमांसा शास्त्र को पढ़ने वाला या जानने वाला। मीमांसाम् अधीते अथवा मीमांसां वेद। मीमांसा अम् से क्रमादिभ्यो वुन् से वुन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके मीमांसा+वु बना। युवोरनाकौ से वु के स्थान पर अक आदेश होकर मीमांसा+अक बना। यस्येति च से सा के उत्तरवर्ती आकार का लोप करके वर्णसम्मेलन होकर मीमांसक बना। स्वादिकार्य करके मीमांसकः सिद्ध हुआ।
परीक्षाः-
१- इस प्रकरण के किन्हीं दस प्रयोगों की सिद्धि दिखायें।
१०
२- नक्षत्रेण युक्तः कालः की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
१०
३- संस्कृतं भक्षाः की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
१०
४- सास्य देवता की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
१०
५- तदधीते तद्वेद की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
१०
श्री वरदराजाचार्य के द्वारा रचित लघुसिद्धान्तकौमुदी में
गोविन्दाचार्य की कृति श्रीधरमुखोल्लासिनी हिन्दी व्याख्या का
रक्ताद्यर्थकप्रकरण पूर्ण हुआ।
अथ चातुरर्थिकाः