भिक्षाणां समूहो भैक्ष्यम्। गर्भिणीनां समूहो गार्भिणम्। इह-
वार्तिकम्- भस्याढे तद्धिते। इति पुंवद्भावे कृते-
.....
षष्ठ्यन्त समर्थ भिक्षादि गणपठित प्रातिपदिकों से 'उसका समूह' अर्थ में तद्धितसंज्ञक अण् प्रत्यय होता है।
आगे कहे जाने वाले अचित्तहस्तिधेनोष्ठक् से विहित ठक् आदि प्रत्ययों को बाधने के लिए इस सूत्र का अवतरण है।
भैक्ष्यम्। भिक्षाओं का समूह। भिक्षाणां समूहः। भिक्षा आम् से अचित्तहस्तिधेनोष्ठक् से ठक् प्रत्यय प्राप्त था, उसे बाधकर भिक्षादिभ्योऽण् से अण् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक् करके भिक्षा+अ बना है। तद्धितेष्वचामादेः से आदिवृद्धि
और यस्येति च से आकार का लोप, वर्णसम्मेलन करके भैक्ष बना। स्वादिकार्य करके भैक्षम् सिद्ध हुआ।