Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 46
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VṛttiGovind
LSK 1047
अण्-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
तस्य समूहः
Aṣṭādhyāyī 4.2.37
Vṛtti Varadarājācārya

काकानां समूहः काकम्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

१०४७- तस्य समूहः। तस्य षष्ठ्यन्तानुकरणं लुप्तपञ्चम्यन्तं, समूहः प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। प्राग्दीव्यतोऽण् से अण् की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार चलता आ रहा है।

षष्ठ्यन्त समर्थ प्रातिपदिक से 'उसका समूह' अर्थ में तद्धितसंज्ञक अण् प्रत्यय होता है।

काकः। कौओं का समूह। काकानां समूहः। काक आम् से तस्य समूहः के द्वारा अण् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रातिपदिकसंज्ञा, सुप् का लुक्, णित् होने के कारण आकार के स्थान पर आकार-रूप आदिवृद्धि, भसंज्ञक अकार का लोप करके वर्णसम्मेलन करने पर काक ही बनता है। समूह अर्थ को बताने के कारण एकवचन सु, अम् आदेश, पूर्वरूप होकर काकम् बनता है। इसी तरह वकानां समूहो वाकम्, वृकाणां समूहो वाकम् आदि बनाये जा सकते हैं। १०४८- भिक्षादिभ्योऽण्। भिक्षा आदिर्येषां ते भिक्षादयस्तेभ्यः। भिक्षादिभ्यः पञ्चम्यन्तम्, अण् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। तस्य समूहः का अनुवर्तन है। प्रत्ययः, परश्च, ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद्वा का अधिकार आ रहा है।