गोत्रे यौ यजिञौ तदन्तात् फक् स्यात्।
१०१२- यजिञोश्च। यञ्च इञ्च तयोरितरेतरद्वन्द्वो यजिञौ, तयोः। यजिञोः पञ्चम्यर्थे षष्ठी, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। गोत्रे कुञ्जादिभ्यश्चक्रञ् से गोत्रे तथा नडादिभ्यः फक् से फक् की अनुवृत्ति आती है। प्रत्यय, परश्च ड्याप्प्रातिपदिकात्, तद्धिताः, समर्थानां प्रथमाद् वा का अधिकार आ रहा है।
गोत्रार्थ में जो यञ् और अञ् प्रत्यय, तदन्त से युवापत्य अर्थ में तद्धितसंज्ञक फक् प्रत्यय होता है।
फक् में ककार की इत्संज्ञा होती है, फ बचता है। फ में अकार को छोड़कर केवल फ् के स्थान पर अग्रिम सूत्र से आयन् आदेश होता है।