आभ्यां लोम्नोऽप् स्याद् बहुव्रीहौ। अन्तर्लोमः। बहिर्लोमः।
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१७३- अन्तर्बहिभ्यां च लोम्नः। अन्तश्च बहिश्च तयोरितरेतरद्वन्द्वः- अन्तर्बहिसौ, ताभ्याम्। अन्तर्बहिभ्यां पञ्चम्यन्तं, चाव्यययं, लोम्नः षष्ठ्यन्तं, त्रिपदं सूत्रम्। अप् पूरणीप्रमाण्योः से अप् और बहुव्रीहौ सव्यक्ष्णोः स्वाङ्गात् षच् से बहुव्रीहौ की अनुवृत्ति आती है। प्रत्ययः, परश्च, तद्धिताः, समासान्ताः ये सब अधिकृत हैं।
बहुव्रीहि समास में अन्तर् और बहिस् इन अव्यय-शब्दों से परे लोमन् शब्द से समासान्त अप् प्रत्यय होता है।
पकार इत्संज्ञक है, अ शेष रहता है।
अन्तर्लोमः। अन्दर रोम है जिसके, ऐसा पुरुष या ऐसी चादर। अन्तर्लोमानि यस्य सः लौकिक विग्रह और अन्तर्+लोमन् जस् अलौकिक विग्रह में अनेकमन्यपदार्थे से समास आदि सभी कार्य करने के बाद अन्तर्लोमन् बना। अन्तर्बहिभ्याञ्च लोम्नः से समासान्त अप् प्रत्यय करके अन्तर्लोमन्+अ बना। नस्तद्धिते से टिसंज्ञक अन् का लोप करके अन्तर् लोम्+अ= अन्तर्लोम ऐसा अकारान्त शब्द बन जाता है। रेफ का ऊर्ध्वगमन होता है। सु आदि प्रत्यय करके राम शब्द की तरह रूप बनते हैं। अन्तर्लोमः, अन्तर्लोमौ, अन्तर्लोमाः आदि। केवल लोमन् शब्द नपुंसकलिङ्ग में है और उसके रूप लोम, लोमनी, लोमानि आदि होते हैं।
बहिर्लोमः। बाहर रोम है जिसके, ऐसा वस्त्र। बहिर्लोमानि यस्य सः लौकिक विग्रह और बहिस्+लोमन् जस् अलौकिक विग्रह में अनेकमन्यपदार्थे से समास आदि सभी कार्य करने के बाद बहिस् लोमन् बना। अन्तर्बहिभ्याञ्च लोम्नः से समासान्त अप् प्रत्यय
करके बहिस् लोमन्+अ वना। नस्तद्धिते से टिसंज्ञक अन् का लोप करके बहिस्
लोम्+अ= बहिस् लोम बनने के बाद बहिस् के सकार को ससजुषो रुः से रुत्व करके
रेफ के ऊर्ध्वगमन होने पर बहिर्लोम ऐसा अकारान्त शब्द बन जाता है। सु आदि प्रत्यय
करके राम शब्द की तरह रूप बनते हैं। बहिर्लोमः, बहिर्लोमौ, बहिर्लोमाः।