Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 41
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VṛttiGovind
LSK 965
बहुव्रीहिसमासाधिकारसूत्रम्
शेषो बहुव्रीहिः
Aṣṭādhyāyī 2.2.23
Vṛtti Varadarājācārya

अधिकारोऽयं प्राग्द्वन्द्वात्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

९६५- शेषो बहुव्रीहिः। शेषः प्रथमान्तं, बहुव्रीहिः प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। इस सूत्र में प्राक्कडारात्समासः से समासः की अनुवृत्ति आती है।

द्वन्द्व समास से पहले का समास बहुव्रीहिसंज्ञक होता है।

यह अधिकारसूत्र है और इसका अधिकार चार्थे द्वन्द्वः तक रहता है। इसी सूत्र के अधिकार में होने वाले समास को बहुव्रीहिसमास कहा जाता है। उक्तादन्यः शेषः जो कहने के बाद बचे, उसे शेष कहते हैं। अव्ययीभाव, तत्पुरुष के बाद जो शेष है किन्तु द्वन्द्व नहीं वह बहुव्रीहि है।