अर्धर्चादयः शब्दाः पुंसि क्लीबे च स्युः। अर्धर्चः, अर्धर्चम्।
एवं ध्वज-तीर्थ-शरीर-मण्डप-यूप-देहाङ्कुश-पात्र-सूत्रादयः।
वार्तिकम्- सामान्ये नपुंसकम्। मृदु पचति। प्रातः कमनीयम्।
इति तत्पुरुषः॥४०॥
१६४- अर्धर्चाः पुंसि च। अर्धर्चाः प्रथमान्तं, पुंसि सप्तम्यन्तं, च अव्ययपदं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में अर्ध नपुंसकम् से नपुंसकम् की अनुवृत्ति आती है। अर्धर्चादि गण है। अर्धर्च आदि गण में पढ़े गये सभी शब्द पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग दोनों होते हैं।
जैसे ऋचः अर्धम् में समास करके समासान्त अच् प्रत्यय करके अर्धर्च बन जाता है और इस सूत्र से दोनों लिङ्गों का विधान होने से पुँल्लिङ्ग में अर्धर्चः और नपुंसकलिङ्ग में अर्धर्चम् ये दो रूप बन जाते हैं। इसी प्रकार ध्वजः-ध्वजम्, तीर्थः-तीर्थम्, शरीरः-शरीरम्, मण्डपः-मण्डपम्, यूपः-यूपम्, देहः-देहम्, अङ्कुशः-अङ्कुशम्, पात्रः-पात्रम्, सूत्रः-सूत्रम् आदि में भी समास हो या न हो उभयलिङ्ग अर्थात् दोनों लिङ्ग होते हैं।
सामान्ये नपुंसकम्। यह वार्तिक है, जहाँ किसी लिङ्ग विशेष का विधान अथवा अपेक्षा न हो, समास या असमास कहीं भी सामान्यतया नपुंसकलिङ्ग ही होता है।
जैसे मृदु पचति (कोमल पकाता है) में जिस पदार्थ का पाचन हो रहा है, उसका स्पष्टतया लिङ्ग का निर्देश नहीं है। अतः सामान्य मानकर इस वार्तिक से नपुंसकलिङ्ग का विधान हुआ। मृदु शब्द नपुंसकलिङ्ग बन गया- मृदु पचति। इसी तरह प्रातः कमनीयम् (प्रातः काल सुन्दर होता है) प्रातः यह अव्यय और कमनीय यह अनीयर् प्रत्ययान्त में भी सामान्य विवक्षा में नपुंसक हुआ है।
परीक्षा
१-
अव्ययीभाव-समास और तत्पुरुष-समास में आपने क्या अन्तर पाया?
५
२-
उपसर्जनसंज्ञा किसकी होती है? उदाहरण एवं सूत्र सहित समझाइये।
५
३-
द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी एवं सप्तमी के किन्हीं तीन-तीन प्रयोगों में समासप्रक्रिया दिखाइये।
२०
४-
कर्मधारयसमास के किन्हीं पाँच प्रयोगों में समासप्रक्रिया दिखाइये।
५
५-
उपमानानि सामान्यवचनैः की व्याख्या कीजिए।
५
६-
परवल्लिङ्ग क्या है? समझाइये।
५
७-
नञ् समास के पाँच उदाहरण सूत्र सहित दर्शाइये।
५
श्री वरदराजाचार्य के द्वारा रचित लघुसिद्धान्तकौमुदी में गोविन्दाचार्य की कृति श्रीधरमुखोल्लासिनी हिन्दी व्याख्या का तत्पुरुषसमास पूर्ण हुआ।
अथ बहुव्रीहिः