द्विगुरपि तत्पुरुषसंज्ञकः स्यात्।
९२३- द्विगुण्य द्विगुः प्रथमान्तं, च अव्ययपदम्। तत्पुरुषः का अधिकार है।
द्विगु भी तत्पुरुषसंज्ञक होता है।
समास में यदि पूर्वपद संख्यावाचक शब्द हो तो उसकी सङ्ख्यापूर्वो द्विगुः इस सूत्र से द्विगुसंज्ञा होती है। द्विगु भी तत्पुरुष कहलाता है। जैसे पञ्चराजम्, द्व्यङ्गुलम् आदि द्विगु-समास को तत्पुरुष भी कहा जाता है।