अधिकारोऽयं प्राग्बहुव्रीहेः।
९२२- तत्पुरुषः। तत्पुरुषः प्रथमान्तम् एकपदमिदं सूत्रम्। यह अधिकारसूत्र है, शेषो बहुव्रीहिः। २।१।२३॥ तक इसका अधिकार जाता है और प्रत्येक सूत्र में जाकर कहता है कि तुमने जो समास किया है, उसका नाम तत्पुरुष है। इसीसे तत्पुरुष एक संज्ञा भी मान ली जाती है।