आपञ्चमसमाप्तेरधिकारोऽयम्।
११६- तद्धिताः। तद्धिताः प्रथमान्तम् एकपदमिदं सूत्रम्।
यह सूत्र ४.१.७६ से लेकर पाँचवें अध्याय की समाप्ति तक तद्धितसंज्ञा का अधिकार करता है।
इसको अधिकारसूत्र और संज्ञासूत्र भी माना गया है। पञ्चम अध्याय की समाप्ति पर्यन्त जो-जो प्रत्यय बतायेंगे, उन सबकी यह तद्धितसंज्ञा करता यद्यपि यह सूत्र तद्धितप्रकरण का है, अतः वहीं पर इसको देना चाहिए, तथापि समास करने के बाद कुछ सूत्र कुछ विशेष प्रत्ययों का विधान करते हैं, जिनको समासान्त प्रत्यय कहा जाता है। पाणिनि जी ने समासान्त प्रत्ययों को भी तद्धिताः इस सूत्र के अधिकार में पढ़ा है। अतः समासान्त प्रत्ययों की भी तद्धितसंज्ञा होती है, यह दिखाने के लिए तद्धिताः यह सूत्र यहाँ पर पढ़ा गया है।