अयं नपुंसकं स्यात्।
९११- अव्ययीभावश्च। अव्ययीभावः प्रथमान्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में स नपुंसकम् से नपुंसकम् की अनुवृत्ति आती है।
अव्ययीभाव-समास होने के बाद सिद्ध शब्द नपुंसकलिङ्ग वाला हो जाता है।
एक जैसे आनुपूर्वी वाले दो सूत्र दो स्थान पर भिन्न-भिन्न कार्य के लिए पढ़े गये हैं। एक तो अव्ययप्रकरण में है जो अव्ययसंज्ञा करता है और दूसरा इस प्रकरण में है जो नपुंसकलिङ्ग का विधान करता है।