Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 38
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VṛttiGovind
LSK 911
नपुंसकलिङ्गविधायकं संज्ञासूत्रम्
अव्ययीभावश्च
Aṣṭādhyāyī 2.4.18
Vṛtti Varadarājācārya

अयं नपुंसकं स्यात्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

९११- अव्ययीभावश्च। अव्ययीभावः प्रथमान्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में स नपुंसकम् से नपुंसकम् की अनुवृत्ति आती है।

अव्ययीभाव-समास होने के बाद सिद्ध शब्द नपुंसकलिङ्ग वाला हो जाता है।

एक जैसे आनुपूर्वी वाले दो सूत्र दो स्थान पर भिन्न-भिन्न कार्य के लिए पढ़े गये हैं। एक तो अव्ययप्रकरण में है जो अव्ययसंज्ञा करता है और दूसरा इस प्रकरण में है जो नपुंसकलिङ्ग का विधान करता है।