समासे उपसर्जनं प्राक्प्रयोज्यम्। इत्यर्थः प्राक्प्रयोगः।
सुपो लुक्, एकदेशविकृतन्यायस्यानन्यत्वात् प्रातिपदिकसंज्ञायां स्वाद्युत्पत्तिः।
अव्ययीभावश्चेत्यव्ययत्वात् सुपो लुक्। अधिहरि।
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९१०- उपसर्जनं पूर्वम्। उपसर्जनं प्रथमान्तं, पूर्वं प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्।
उपसर्जनसंज्ञक का पूर्व में प्रयोग होता है।
यह सूत्र जिसकी प्रथमानिर्दिष्टं समास उपसर्जनम् से उपसर्जनसंज्ञा हुई उसे पूर्व में प्रयोग करने का निर्देश देता है।
अधिहरि ( हरि में ) यह विभक्ति अर्थ में समास का उदाहरण है। इस प्रयोग में अधि शब्द सप्तमीविभक्ति के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। हरौ इति यह लौकिक विग्रह और हरि डि अधि यह अलौकिक विग्रह है। सूत्र अलौकिक विग्रह में ही लगते हैं। हरि डि
अधि इस अलौकिक विग्रह में समास करने के लिए सूत्र लगा- अव्ययं विभक्ति-समीप-समृद्धि-व्युद्ध्यर्थाभावात्ययासम्प्रति-शब्दप्रादुर्भाव-पश्चाद्यथानुपूर्व्य- यौगपद्य-सादृश्य-सम्पत्ति-साकल्यान्तवचनेषु। अव्यय का विभक्ति आदि अर्थों में समर्थ सुबन्त के साथ समास होता है। यह अव्यय है- अधि, इसके साथ सामर्थ्य रखने वाला समर्थ सुबन्त है- हरि डि। इस सूत्र से हरि डि अधि का समास हो गया अर्थात् यह पूरा समुदाय समाससंज्ञा को प्राप्त हो गया। समास करने के बाद हरि डि अधि इस समुदाय की कृत्तिद्धितसमासाश्च से प्रातिपदिकसंज्ञा हो गई, हरि डि अधि यह पूरा समुदाय प्रातिपदिक कहलाया। इसलिए इसमें लगा डि-प्रत्यय प्रातिपदिक का अवयव बन गया। डि का सुपो धातुप्रातिपदिकयोः से लुक् हुआ। हरि अधि बना। अव्ययं विभक्ति-समीप-समृद्धि-व्युद्ध्यर्थाभावात्ययासम्प्रति-शब्दप्रादुर्भाव-पश्चाद्यथानुपूर्व्य-यौगपद्य-सादृश्य-सम्पत्ति-साकल्यान्तवचनेषु इस समासविधायक सूत्र में प्रथमान्तपद है- अव्ययम्, इस पद से निर्दिष्ट है- अधि, अतः अधि की प्रथमानिर्दिष्ट समास उपसर्जनम् से उपसर्जनसंज्ञा हो गई तो उपसर्जन पूर्वम् से उपसर्जनसंज्ञक अधि का पूर्वप्रयोग हुआ अर्थात् पर में था पूर्व में आ गया- अधिहरि बना। पहले हरि डि अधि की प्रातिपदिकसंज्ञा की गई थी किन्तु वह सब बदल गया, अधिहरि बना, फिर भी वह प्रातिपदिक बना हुआ है। एकदेशविकृतमनन्यवत् के बल से विकृति होने पर भी वह प्रातिपदिक बना रहता है। अतः अधिहरि को प्रातिपदिक मानकर सु विभक्ति आई और अव्ययप्रकरण के अव्ययीभावश्च से अव्ययसंज्ञक होने के कारण अधिहरि इस प्रातिपदिक से आई विभक्ति का अव्ययादाप्सुपः से लुक् हुआ- अधिहरि।