समासशास्त्रे प्रथमानिर्दिष्टमुपसर्जनसंज्ञां स्यात्।
९०९- प्रथमानिर्दिष्टं समास उपसर्जनम्। प्रथमया निर्दिष्टं प्रथमानिर्दिष्टम्। प्रथमानिर्दिष्टं प्रथमान्तं, समासे सप्तम्यन्तम्, उपसर्जनं प्रथमान्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्।
समासविधायक सूत्र में प्रथमान्त जो पद, उसके द्वारा निर्दिष्ट शब्द उपसर्जनसंज्ञक होता है।
समास करने वाले सूत्रों में अथवा अनुवृत्ति लाकर बनाई गई वृत्ति में जो शब्द प्रथमाविभक्ति वाला है, उसके द्वारा निर्दिष्ट जो पद उसकी यह सूत्र उपसर्जनसंज्ञा करता है। जैसे अव्ययं विभक्ति-समीप-समृद्धि-व्यृद्ध्यर्थाभावात्ययासम्प्रति-शब्दप्रादुर्भाव-पश्चाद्यथानुपूर्व्य-यौगपद्य-सादृश्य-सम्पत्ति-साकल्यान्तेवचनेषु यह सूत्र समासविधायक है। इस सूत्र में प्रथमान्तपद है- अव्ययम्। इस पद से जिस का ग्रहण किया जाता है उसकी उपसर्जनसंज्ञा की जाती है तो आगे के प्रयोगों में अधि आदि पद अव्ययम् से गृह्यमाण हैं, अतः उनकी उपसर्जनसंज्ञा हो जायेगी।