Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 38
Show
VṛttiGovind
LSK 905
समाससंज्ञाधिकारविधायकमधिकारसूत्रम्
प्राक् कडारात् समासः
Aṣṭādhyāyī 2.1.3
Vṛtti Varadarājācārya

‘कडारा कर्मधारये’ इत्यतः प्राक् समास इत्यधिक्रियते।

.....

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

गच्छति के लिए देवदत्त+सु, गृह+अम्, गच्छ+लट् ऐसा नहीं बोल सकते। इससे यह ज्ञात हुआ कि लोक में प्रयोग करने योग्य विग्रह को लौकिक विग्रह और केवल व्याकरणशास्त्र की प्रक्रिया को सिद्ध करने के लिए बनाये गये विग्रह को अलौकिक विग्रह कहते हैं। समास के सूत्र अलौकिक विग्रह में ही लगते हैं।

९०५- प्राक्कडारात्समासः। प्राक् अव्ययपदं, कडारात् पञ्चम्यन्तं, समासः प्रथमान्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। यह अधिकारसूत्र है।

कडाराः कर्मधारये इस सूत्र से पूर्व तक इस सूत्र का अर्थात् समासः इस पद का अधिकार चलता है।

यथा- “सह सुपा” यह सूत्र प्राक्कडारात्समासः सूत्र से लेकर कडाराः कर्मधारये इन दोनों सूत्रों के मध्य में आता है, अतः इस सूत्र में भी समासः का अधिकार होने से इस सूत्र में समास पद आता है। जहाँ-जहाँ भी समासः का अधिकार जाता है और उन सूत्रों से जो कार्य होता है, उसे समास कहते हैं।