Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 37
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VṛttiGovind
LSK 896
सम्प्रदानसंज्ञाविधायकं संज्ञासूत्रम्
कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्
Aṣṭādhyāyī 1.4.32
Vṛtti Varadarājācārya

दानस्य कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानसंज्ञः स्यात्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

श्याम के बाजार पहुँचने में अत्यन्त सहायक है वाहन। अतः वाहन की इस सूत्र से करणसंज्ञा हुई। करणसंज्ञा का फल तृतीया-विभक्ति करना है। वाहन में करणसंज्ञा होकर तृतीया विभक्ति हो गई- वाहनेन।

८९६- कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्। कर्मणा तृतीयान्तं, यं द्वितीयान्तम्, अभिप्रैति तिङन्तं क्रियापदं, स प्रथमान्तं, सम्प्रदानं प्रथमान्तम्, अनेकपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में कारके का अधिकार है।