Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 37
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VṛttiGovind
LSK 895
तृतीयाविभक्तिविधायकं विधिसूत्रम्
कर्तृकरणयोस्तृतीया
Aṣṭādhyāyī 2.3.18
Vṛtti Varadarājācārya

अनभिहिते कर्तरि करणे च तृतीया स्यात्।

रामेण बाणेन हतो बाली।

इति तृतीया।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८९५- कर्तृकरणयोस्तृतीया। कर्ता च करणं च कर्तृकरणे, तयोः। कर्तृकरणयोः सप्तम्यन्तं, तृतीया प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में अनभिहिते का अधिकार है। अनभिहिते का अर्थ है- अनुक्ते।

अनुक्त कर्ता और अनुक्त करण में तृतीया-विभक्ति होती है।

रामेण बाणेन हतो बाली। राम के द्वारा बाण से बाली मारा गया। यहाँ हननक्रिया में स्वतन्त्रतया विवक्षित होने से स्वतन्त्रः कर्ता के अनुसार राम कर्ता है। इसी प्रकार हननक्रिया में अत्यन्त सहायक होने से साधकतमं करणम् से बाण की करणसंज्ञा हुई है। यहाँ पर हन् धातु से तयोरेव कृत्यक्तखलर्थाः से कर्म अर्थ में क्त प्रत्यय होकर हतः बना है। कर्म अर्थ में प्रत्यय होने के कारण कर्म उक्त हुआ और कर्ता, करण आदि स्वतः अनुक्त हुए। कर्तृकरणयोस्तृतीया से अनुक्त कर्ता राम और अनुक्त करण बाण दोनों में तृतीयाविभक्ति हो गई- रामेण बाणेन हतो बाली। इस वाक्य में बाली कर्म है। कर्म के उक्त होने के कारण कर्मणि द्वितीया से द्वितीया-विभक्ति नहीं हुई, किन्तु प्रातिपदिकार्थलिङ्गपरिमाण- वचनमात्रे प्रथमा से प्रातिपदिकार्थमात्र में प्रथमा विभक्ति हुई-बाली।

छात्रों को समझाने के लिए करण-तृतीया और दे रहे हैं-

बालकः कन्दुकेन क्रीडति। बालक गेंद से खेलता है। इस वाक्य में खेलन रूप क्रिया में स्वतन्त्र विवक्षित बालक है। क्रीड धातु से कर्ता अर्थ में लकार हुआ है। अतः इस वाक्य में कर्ता उक्त है। कर्ता उक्त हुआ तो कर्म, करण आदि स्वतः अनुक्त हुए। बालक के खेलने में अत्यन्त सहायक है गेंद। अतः गेंद का वाचक कन्दुक शब्द साधकतमं करणम् से करणसंज्ञक है। करणसंज्ञा का फल कर्तृकरणयोस्तृतीया से तृतीया विभक्ति करना है। अतः कन्दुक में तृतीया विभक्ति हो गई- बालकः कन्दुकेन क्रीडति।