८७२- पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण। पुंसि सप्तम्यन्तं, संज्ञायां सप्तम्यन्तं, घः प्रथमान्तं, प्रायेण तृतीयान्तम्, अनेकपदं सूत्रम्। करणाधिकरणयोश्च से करणाधिकरणयोः की अनुवृत्ति आती है। धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।
पुँल्लिङ्ग में संज्ञा-वाच्य होने पर करण और अधिकरण अर्थ में प्रायः घ प्रत्यय होता है।
घकार की लशक्वतद्धिते से इत्संज्ञा होती है, अ शेष रहता है। घ और घित् होने के अनेक प्रयोजन हैं। घ को निमित्त मान कर लगने वाला अगला ही सूत्र है। घ प्रत्ययान्त शब्द पुँल्लिङ्ग होता है।