Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 36
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Govind
LSK 872
घ-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण
Aṣṭādhyāyī 3.3.118
Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८७२- पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण। पुंसि सप्तम्यन्तं, संज्ञायां सप्तम्यन्तं, घः प्रथमान्तं, प्रायेण तृतीयान्तम्, अनेकपदं सूत्रम्। करणाधिकरणयोश्च से करणाधिकरणयोः की अनुवृत्ति आती है। धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।

पुँल्लिङ्ग में संज्ञा-वाच्य होने पर करण और अधिकरण अर्थ में प्रायः घ प्रत्यय होता है।

घकार की लशक्वतद्धिते से इत्संज्ञा होती है, अ शेष रहता है। घ और घित् होने के अनेक प्रयोजन हैं। घ को निमित्त मान कर लगने वाला अगला ही सूत्र है। घ प्रत्ययान्त शब्द पुँल्लिङ्ग होता है।