हसितम्। हसनम्।
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नपुंसकत्व में भाव अर्थ में ल्युट् प्रत्यय भी होता है।
लकार और टकार इत्संज्ञक हैं, यु बचता है। उसके स्थान पर युवोरनाकौ से अन आदेश होता है।
हसितम्, हसनम्। हँसना। हस हसने। यहाँ हस् धातु है। नपुंसके भावे क्तः से क्त प्रत्यय होने के बाद अनुबन्धलोप होकर हस्+त बना। प्रत्यय की आर्धधातुकसंज्ञा करके वलादि आर्धधातुकलक्षण इट् आगम होकर वर्णसम्मेलन हुआ- हसित बना। प्रातिपदिकसंज्ञा, सु, अम् आदेश होकर हसितम् सिद्ध हुआ। ल्युट् च से ल्युट् होने के पक्ष में अनुबन्धलोप होकर यु के स्थान पर युवोरनाकौ से अन आदेश होकर हस्+अन=हसन बना। वलादि न होने के कारण इट् आगम नहीं हुआ। प्रातिपदिकसंज्ञा, सु, अम्, हसनम् बना। इस तरह पठ्
से पठनम्, गम् से गमनम्, लिख् से लेखनम् इत्यादि सभी धातुओं से यह प्रत्यय किया जा सकता है। णिजन्त धातुओं से ल्युट् करने पर णेरनिटि से णि का लोप किया जाता है, इस बात का ध्यान रखना चाहिए।