यज्ञः। याच्ञा। यत्नः। विश्नः। प्रश्नः। रक्षणः।
८६०- यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ्। यजश्च याचश्च यतश्च विच्छश्च प्रच्छश्च रक्ष् च तेषां समाहारद्वन्द्वः यजयाजयतविच्छप्रच्छरक्ष्, तस्मात्। यजयाजयतविच्छप्रच्छरक्षः पञ्चम्यन्तं, नङ् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। भावे और संज्ञायाम् को छोड़कर अकर्तरि च कारके संज्ञायाम् की अनुवृत्ति आती है धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।
भाव और कर्तृभिन्न कारक में यज्, याच्, यत्, विच्छ्, प्रच्छ् और रक्ष् धातुओं से नङ्-प्रत्यय होता है।
नङ् में डकार इत्संज्ञक है। डित् करने के अनेक प्रयोजन हैं। नङ् प्रत्ययान्त शब्द पुँल्लिङ्ग होता है।
यज्ञः। यजनं यज्ञः। यज देवपूजासङ्गतिकरणदानेषु। देवपूजा आदि अर्थ में विद्यमान यज्-धातु से यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ् के द्वारा नङ् प्रत्यय हुआ, डकार का लोप
हुआ, यज्+न बना। जकार से परे नकार का स्तोः श्चुना श्चुः से चुत्व होकर जकार बन गया। यज्+ज बना। जकार और जकार का संयोग होने पर ज्ञ बन जाता है, अतः यहाँ यज्ञ बन गया। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा हुई, सु हुआ और रुत्वविसर्ग हुआ, यज्ञः।
याच्ञा। टुयाचृ याच्ञायाम्। याच् धातु से पूर्ववत् भाव अर्थ में नङ् प्रत्यय होकर चुत्व करके याच्ञ बना। स्त्रीत्व में टाप् करके याच्ञा बना। यहाँ ज्ञ नहीं बनता क्योंकि जकार और जकार के संयोग में ज्ञ बनता है, जकार और चकार के संयोग में नहीं। याच्ञा बनने के बाद प्रातिपदिकसंज्ञा, सु विभक्ति और रमा की तरह सुलोप होकर याच्ञा सिद्ध होता है।
यत्नः। यतनं यत्नः। प्रयत्न। यती प्रयत्ने। यत् धातु से यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ् से नङ् प्रत्यय हुआ, अनुबन्धलोप होकर यत्+न, यत्न बना। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा हुई, सु, उसके स्थान पर रुत्वविसर्ग हुआ, यत्नः।
विश्नः। विच्छनं विश्नः। विच्छ् गतौ । विच्छ् धातु से यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ् से नङ् प्रत्यय हुआ, ङकार का लोप हुआ, विच्छ्+न बना। चकार सहित छकार के स्थान पर च्छ्वोः शूडनुनासिके च सूत्र से शकार आदेश होकर विश्+न बना। शकार को स्तोः श्चुना श्चुः से श्चुत्व प्राप्त था, शात् सूत्र से निषेध हुआ। अतः विश्न ही रह गया। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा हुई, सु, उसके स्थान पर रुत्वविसर्ग हुआ, विश्नः।
प्रश्नः। प्रच्छनं प्रश्नः। प्रच्छ् ज्ञीप्सायाम्। प्रच्छ् धातु से यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ् से नङ् प्रत्यय हुआ, ङकार का लोप हुआ, प्रच्छ्+न, बना। च्छ्वोः शूडनुनासिके च से सतुक् च्छ् के स्थान पर श आदेश हुआ- प्रश्+न, प्रश्न बना। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा हुई, सु, रुत्वविसर्ग, प्रश्नः।
रक्ष्णः। रक्षणं रक्ष्णः। रक्ष पालने। रक्ष् धातु से यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो नङ् से नङ् प्रत्यय हुआ, ङकार का लोप हुआ, रक्ष्+न बना। रक्षाभ्यां नो णः समानपदे से णत्व करके रक्ष्णः बना। इसकी प्रातिपदिकसंज्ञा हुई, सु, रुत्वविसर्ग हुआ, रक्ष्णः।