टुवेपृ कम्पने। वेपथुः।
८५९- टिवतोऽथुच्। टु इत् यस्य स टिवत्, तस्मात्। टिवतः पञ्चम्यन्तम्, अथुच् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। भावे एवं अकर्तरि च कारके की अनुवृत्ति और धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है।
टु की इत्संज्ञा जिस धातु में हुई है ऐसी टिवत् धातु से भाव में अथुच् प्रत्यय होता है।
चकार इत्संज्ञक है, अथु शेष रहता है।
वेपथुः। कम्पन। टुवेपृ कम्पने। वेप् धातु से टिवतोऽथुच् से अथुच् प्रत्यय करके अनुबन्धलोप करने पर वेप्+अथु बना। वर्णसम्मेलन, प्रातिपदिकसंज्ञा, सु, रुत्वविसर्ग करके वेपथुः सिद्ध हुआ। ऐसे ही कई टिवत् धातुओं से अथुच् प्रत्यय करके नन्दथुः, वमथुः, भ्राजथुः, मज्जथुः, याचथुः, स्फूर्जथुः आदि भी बनते हैं।