Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 36
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VṛttiGovind
LSK 850
तुमन्प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
कालसमयवेलासु तुमुन्
Aṣṭādhyāyī 3.3.167
Vṛtti Varadarājācārya

कालार्थेषूपपदेषु तुमन्। कालः समयो वेला वा भोक्तुम्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

काल, समय, वेला जैसे काल अर्थवाची शब्दों के उपपद रहते धातुओं से तुमन् प्रत्यय होता है।

भविष्यति अर्थ और क्रियार्थी क्रिया के अभाव में पूर्व सूत्र से अप्राप्त तुमन् का यह सूत्र विधान करता है।

कालः समयो वेला वा भोक्तुम्। भोजन के लिए समय। भुज पालनाभ्यवहारयोः। भुज् धातु से कालसमयवेलासु तुमन् से तुमन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप, प्रत्यय की आर्धधातुकसंज्ञा, उपधागुण, एकाच उपदेशेऽनुदात्तात् से इट् का निषेध, जकार को चोः कुः से कुत्व करके गकार, उसको खरि च से चर्त्व, ककार, भोक्तुम् बना। मान्त होने से अव्ययसंज्ञा, प्रातिपदिकसंज्ञा, सु, अव्ययत्वात् उसका लुक् करके भोक्तुम् बनता है। इसका प्रयोग- भोक्तुं कालः, भोक्तुं समयः, भोक्तुं वेला।

कुछ धातुओं से निष्पन्न तुमुन्नत्त शब्दों को यहाँ पर दिखा रहे हैं। अन्य धातुओं

से भी आप तुमुन् प्रत्यय लगाकर रूप बनाने की चेष्टा करें।

अर्च-अर्चितुम्=पूजने के लिए

अर्ज-अर्जितुम्=कमाने के लिए

अव्-अवितुम्=बचाने के लिए

अस्-भवितुम्=होने के लिए

आप्-आप्तुम्=पाने के लिए

कथ्-कथयितुम्=कहने के लिए

कृ-कर्तुम्=करने के लिए

क्री-क्रेतुम्=खरीदने के लिए

क्रीड्-क्रीडितुम्=खेलने के लिए

खाद्-खादितुम्=खाने के लिए

खेल्-खेलितुम्=खेलने के लिए

गम्-गन्तुम्=जाने के लिए

गै, गा-गातुम्=गाने के लिए

ग्रह्-ग्रहीतुम्=ग्रहण करने के लिए

चल्-चलितुम्=चलने के लिए

जन्-जनितुम्=पैदा होने के लिए

जप्-जपितुम्=जपने के लिए

जाग्-जागरितुम्=जागने के लिए

जि-जेतुम्=जीतने के लिए

जीव्-जीवितुम्=जीने के लिए

ज्ञा-ज्ञातुम्=जानने के लिए

त्यज्-त्यक्तुम्=छोड़ने के लिए

त्रै, त्रा-त्रातुम्=बचाने के लिए

दह्-दग्धुम्=जलाने के लिए

दा-दातुम्=देने के लिए

दृश्-द्रष्टुम्=देखने के लिए

धाव्-धावितुम्=दौड़ने के लिए

धृ-धर्तुम्=धारण करने के लिए

ध्यै, ध्या-ध्यातुम्=ध्यान करने के लिए

नम्-नन्तुम्=झुकने के लिए

नी-नेतुम्=ले जाने के लिए

पच्-पक्तुम्=पकाने के लिए

पठ्-पठितुम्=पढ़ने के लिए

पत्-पतितुम्=गिरने के लिए

पा-पातुम्=पीने के लिए

पूज्-पूजयितुम्=पूजने के लिए

ब्रू, वच्-वक्तुम्=कहने के लिए

भक्ष्-भक्षयितुम्=खाने के लिए

भण्-भणितुम्=कहने के लिए

भाष्-भाषितुम्=बोलने के लिए

भुज्-भोक्तुम्=खाने के लिए

भू-भवितुम्=होने के लिए

रक्ष्-रक्षितुम्=रक्षा करने के लिए

रच्-रचयितुम्=बनाने के लिए

रम्-रन्तुम्=रमण करने के लिए

रुद्-रोदितुम्=रोने के लिए

लभ्-लब्धुम्=पाने के लिए

लिख्-लेखितुम्=लिखने के लिए

विद्-वेदितुम्=जानने के लिए

वृध्-वर्धितुम्=बढ़ने के लिए

शक्-शक्तुम्=सकने के लिए

शिक्ष्-शिक्षितुम्=सीखने के लिए

शु-श्रोतुम्=सुनने के लिए

सेव्-सेवितुम्=सेवा करने के लिए

स्तु-स्तोतुम्=स्तुति करने के लिए

स्था-स्थातुम्=ठहरने के लिए

स्ना-स्नातुम्=नहाने के लिए

स्मृ-स्मर्तुम्=याद करने के लिए

हन्-हन्तुम्=मारने के लिए

हस्-हसितुम्=हसने के लिए

ह्-हर्तुम्=हरने के लिए

आ-ह्वे-आह्वातुम्=बुलाने के लिए

अध्यापि-अध्यापयितुम्=पढ़ाने के लिए

दर्शयितुम्=दिखाने के लिए

श्नावयितुम्=सुनाने के लिए

घातयितुम्=मरवाने के लिए

ग्राहयितुम्=ग्रहण कराने के लिए

प्रसादयितुम्=प्रसन्न करने के लिए

कारयितुम्=करवाने के लिए

लेखयितुम्=लिखवाने के लिए।

जनयितुम्=पैदा करने के लिए

तापयितुम्=खुश करने के लिए।