व्यवस्थितविभाषेयम्। तेनाप्रथमासामानाधिकरण्ये प्रत्ययोत्तरपदयोः सम्बोधने लक्षणहेत्वोश्च नित्यम्। करिष्यन्तं करिष्यमाणं पश्य।
८३५- लृटः सद्वा। लृटः षष्ठ्यन्तं, सत् प्रथमान्तं, वा अव्ययपदं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। लिट् के स्थान पर सत्-संज्ञक अर्थात् शतृ और शानच् आदेश विकल्प से होते हैं।
इस विकल्प को व्यवस्थित विभाषा कहा गया है। विभाषा का अर्थ विकल्प और व्यवस्थित का तात्पर्य है- जो विकल्प किसी स्थान पर नित्य से हो, अन्य स्थान पर एकपक्ष में भी न हो और किसी स्थान पर एक बार हो और एक बार न हो अर्थात् कहीं नित्य से प्रवृत्ति, कहीं नित्य से अप्रवृत्ति और कहीं दोनों व्यवस्था व्यवस्थित विभाषा में होती है।
तेनाप्रथमा.....नित्यम्। व्यवस्थित विभाषा मानने के कारण प्रथमाभिन्न के साथ सामानाधिकरण्य होने पर प्रत्यय और उत्तरपद के पर में होने पर, सम्बोधन में तथा लक्षण और हेतु अर्थ होने पर नित्य से लृट् के स्थान पर शतृ और शानच् होते हैं। सम्बोधन आदि में शतृ-शानच् करने वाला सूत्र लघुकौमुदी में नहीं दिये गये हैं। अतः हम भी इनका विवरण सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या में देने वाले हैं।
करिष्यन्तं करिष्यमाणं पश्य। कृ-धातु उभयपदी है। उससे लृट् लकार, उसके स्थान पर परस्मैपद में शतृ और आत्मनेपद में शानच् हुआ। दोनों में अनुबन्धलोप होने पर कृ+अत् और कृ+आन हुआ। शित् होने के कारण दोनों की सार्वधातुकसंज्ञा, स्थानिवद्धावेन लृट् का लकारत्व आया, स्यतासी लृलुटोः से स्य प्रत्यय होकर कृ+स्य+अत् और कृ+स्य+आन हुआ। स्य की आर्धधातुकं शेषः से आर्धधातुकसंज्ञा करके ऋद्धनोः स्ये से आर्धधातुक को इट् का आगम हुआ, कृ+इस्य+अत् एवं कृ+इस्य+आन हुआ। दोनों जगह कृ को सार्वधातुकार्धधातुकयोः से अर्-गुण हुआ, कर्+इस्य+अत् एवं कर्+इस्य+आन हुआ। वर्णसम्मेलन होने पर करिस्य+अत् और करिस्य+आन हुआ। इकार से परे सकार को षत्व होकर करिष्य+अत् और करिष्य+आन हुआ। करिष्य+अत् में अतो गुणो से पररूप होकर करिष्यत् हुआ एवं करिष्य+आन में आने मुक् से मुक् आगम होकर करिष्यमान बना। षकार से परे होने के कारण नकार के स्थान पर अट्कुप्वाङ्नुम्व्यवायेऽपि से णत्व हुआ, करिष्यमाण बना। करिष्यत् और करिष्यमाण की प्रातिपदिकसंज्ञा हुई और सु आया, करिष्यत् से प्रथमा में पठन् की तरह करिष्यन् और करिष्यमाण से रामः की तरह करिष्यमाणः बना तथा द्वितीया के एकवचन में करिष्यन्तम् और करिष्यमाणम् बने। इस तरह करिष्यन्तं, करिष्यमाणं पश्य ये रूप सिद्ध हुए।