Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
Show
VṛttiGovind
LSK 834
सत्संज्ञाविधायकं संज्ञासूत्रम्
तौ सत्
Aṣṭādhyāyī 3.2.127
Vṛtti Varadarājācārya

तौ शतृ-शानचौ सत्संज्ञौ स्तः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८३४- तौ सत्। तौ प्रथमान्तं, सत् प्रथमान्तं, द्विपदं सूत्रम्। तौ यह पद लृटः शतृशानचावप्रथमा-समानाधिकरणे से विहित शतृ और शानच् स्वरूपनिर्देश है।

शतृ और शानच् की सत् संज्ञा होती है।

जैसे- निष्ठा कहने से क्त और क्तवतु प्रत्यय का ज्ञान होता है, उसी प्रकार सत् कहने से शतृ और शानच् का ज्ञान होगा। सत्-संज्ञा का उपयोग लृटः सद्वा आदि सूत्रों में किया जायेगा।