Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
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Govind
LSK 811
ड-प्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
सप्तम्यां जनेर्डः
Aṣṭādhyāyī 3.2.97
Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८११- सप्तम्यां जनेर्डः। सप्तम्यां सप्तम्यन्तं, जनेः पञ्चम्यन्तं, डः प्रथमान्तं, त्रिपदं सूत्रम्। भूते, धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है। किसी पद की अनुवृत्ति नहीं है।

सप्तम्यन्त के उपपद रहने पर जन धातु से ड प्रत्यय होता है।

डकार की इत्संज्ञा होकर अ बचता है। डित् का फल डित्त्वसामर्थ्यादभस्यापि टेलोपः अर्थात् भसंज्ञा के विना भी टि का लोप करना। अन्यथा डित् का कोई प्रयोजन नहीं है।