Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
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VṛttiGovind
LSK 803
णिनिप्रत्ययविधायकं विधिसूत्रम्
सुप्यजातौ णिनिस्ताच्छील्ये
Aṣṭādhyāyī 3.2.78
Vṛtti Varadarājācārya

अजात्यर्थे सुपि धातोर्णिनिस्ताच्छील्ये द्योत्ये। उष्णभोजी।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

८०३- सुप्यजातौ णिनिस्ताच्छील्ये। न जातिरजातिस्तस्यामजातौ। सः (धात्वर्थः) शीलं (स्वभावो) यस्य स तच्छीलः, तस्य भावस्ताच्छील्यं, तस्मिन्। सुपि सप्तम्यन्तम्, अजातौ सप्तम्यन्तं, णिनिः प्रथमान्तं, ताच्छील्ये सप्तम्यन्तम्, अनेकपदं सूत्रम्। धातोः, प्रत्ययः, परश्च का अधिकार है ही।

जात्यर्थ से भिन्न सुबन्त के उपपद होने पर धातु से परे णिनि प्रत्यय होता है यदि कर्ता का शील अर्थात् स्वभाव द्योतित हो तो।

ताच्छील्य का तात्पर्य स्वभाव से है। कर्ता अर्थ में प्रत्यय का विधान हो रहा है। अतः ताच्छील्य अर्थात् स्वभाव भी कर्ता का ही होगा किन्तु वह धातु के अर्थ के अनुसार का स्वभाव होना चाहिए। णिनि में णकार और अन्त्य इकार इत्संज्ञक हैं, इन् शेष रहता है।

उष्णभोजी। उष्णं भुङ्क्ते तच्छीलम्। गरमागरम खाने का स्वभाव वाला। भुज (पालनाभ्यवहारयोः) धातु है। उष्ण यह कर्म उपपद है। यहाँ पर जाति अर्थ से भिन्न सुबन्त उपपद है और ताच्छील्य अर्थात् स्वभाव अर्थ भी गम्यमान है। अतः सुप्यजातौ णिनिस्ताच्छील्ये से णिनि प्रत्यय हुआ। अनुबन्धलोप होने के बाद उष्ण+अम्+भुज्+इन् बना। कृत् के योग में कर्तृकर्मणोः कृति से उपपद कर्म उष्ण के साथ षष्ठी विभक्ति आई तो उष्ण ङस्+भुज् इन् बना। अब पुगन्तलघूपधस्य च से भुज् को उपधागुण करके ओकार और उपपदमतिङ् से उपपदसमास करके सुप् का लुक्, उष्णभोजिन् यह प्रातिपदिक निष्पन्न हुआ। इससे शार्ङ्गिन् शब्द की तरह सुबन्त में रूप बनाये जाते हैं। उष्णभोजी, उष्णभोजिनौ, उष्णभोजिनः, उष्णभोजिनम्, उष्णभोजिनौ, उष्णभोजिनः, उष्णभोजिना, उष्णभोजिभ्याम्, उष्णभोजिभिः, उष्णभोजिने, उष्णभोजिभ्यः, उष्णभोजिनोः, उष्णभोजिनाम्, उष्णभोजिषु, हे उष्णभोजिन् आदि। इसी तरह कुछ अन्य प्रयोग भी देखें।

सत्यं वदति तच्छीलः (सत्य बोलने वाला) सत्यवादी, सत्यवादिनौ, सत्यवादिनः।

मृदु भाषते तच्छीलः (मधुर बोलने वाला। मृदुभाषी, मदुभाषिणौ, मृदुभाषिणः।

शीतं भुङ्क्ते तच्छीलः। (ठंडा खाने का स्वभाव वाला) शीतभोजी, शीतभोजिनौ, शीतभोजिनः।

मितं भाषते तच्छीलः (कम बोलने का स्वभाव वाला) मितभाषी, मितभाषिणौ, मितभाषिणः।

प्रियं वदति तच्छीलः (प्रिय बोलने का स्वभाव वाला) प्रियवादी, प्रियवादिनौ, प्रियवादिनः।