Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 34
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VṛttiGovind
LSK 800
इणिनेषेधकं विधिसूत्रम्
नेड् वशि कृति
Aṣṭādhyāyī 7.2.8
Vṛtti Varadarājācārya

वशादेः कृत इण् न स्यात्। शृ हिंसायाम्। सुशर्मा। प्रातरित्वा।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

वश् प्रत्याहार आदि में हो ऐसे कृत् प्रत्यय के परे होने पर इट् का आगम नहीं होता।

वशि यह पद कृति का विशेषण है। वश् यह प्रत्याहार है, अतः यस्मिन् विधिस्तदादावल्ग्रहणे के नियम से तदादिविधि होकर वशादि कृत् के परे होने पर ऐसा अर्थ बन जाता है। वश् प्रत्याहार में व्, र्, ल्, ञ्, म्, ङ्, ण्, न्, झ्, भ्, घ्, ढ्, ध्, ज्, व्, ग्, ङ्, द् ये वर्ण आते हैं। आर्धधातुकस्येड् वलादेः से प्राप्त इट् का यह निषेधक सूत्र है।

अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते के द्वारा किये जाने वाले मनिन्, क्वनिप्, वनिप् और विच् प्रत्ययों के क्रमशः उदाहरण-

सुशर्मा। सुष्ठु शृणाति हिनस्ति पापानीति, पापों का अच्छी तरह नाश करने वाला। सु-पूर्वक शृधातु से अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते से मनिन् प्रत्यय, अनुबन्धलोप होकर मन् बचा, सुश्+मन् बना। यहाँ पर मन् की आर्धधातुकसंज्ञा होकर आर्धधातुकस्येड्वलादेः से इट् प्राप्त था, उसका नेड् वशि कृति से निषेध हुआ। ॠकार को गुण होकर सुशर्+मन् बना। वर्णसम्मेलन होकर सुशर्मन् बना। प्रातिपदिकसंज्ञा होने पर सु विभक्ति आई और यज्वन् से यज्वा की तरह सुशर्मन् से सुशर्मा बन गया। सुशर्माणौ, सुशर्माणः, सुशर्माणम्, सुशर्माणौ, सुशर्मणः, सुशर्मणा, सुशर्मभ्याम्, सुशर्मभिः, सुशर्मणे, सुशर्मभ्यः, सुशर्मणाम् आदि।

प्रातरित्वा। प्रातरेति। प्रातः काल को जाने वाला। प्रातर-पूर्वक इण् गतौ धातु है। प्रातर्+इ से अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते से वनिप् प्रत्यय, अनुबन्धलोप होकर वन् बचा, प्रातर्+वन् बना। यहाँ पर वन् की आर्धधातुकसंज्ञा होकर आर्धधातुकस्येड्वलादेः से इट् प्राप्त, उसका नेड् वशि कृति से निषेध होने पर ह्रस्वस्य पिति कृति तुक् से तुक् का आगम होकर प्रातर्+इत्+वन् हुआ। वर्णसम्मेलन होकर प्रातरित्वन् बना। प्रातिपदिकसंज्ञा होने पर सु विभक्ति आई और यज्वन् से यज्वा की तरह प्रातरित्वन् से प्रातरित्वा बन गया। इसके रूप- प्रातरित्वा, प्रातरित्वानौ, प्रातरित्वानः, प्रातरित्वानम्, प्रातरित्वानौ, प्रातरित्वनः, प्रातरित्वना, प्रातरित्वभ्याम्, प्रातरित्वभिः, प्रातरित्वने, प्रातरित्वभ्यः, प्रातरित्वनोः, प्रातरित्वनाम्, प्रातरित्वनि, प्रातरित्वसु, हे प्रातरित्वन् आदि।