एते भावकर्मणोरेव स्युः।
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७७०- तयोरेव कृत्यक्तखलर्थाः। खलोऽर्थः खलर्थः, षष्ठीतत्पुरुषः। कृत्याश्च क्ताश्च खलर्थाश्च तेषामितरतरेद्धन्द्वः कृत्यक्तखलर्थाः। तयोः सप्तम्यन्तम्, एव अव्ययपदं, कृत्यक्तखलर्थाः प्रथमान्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्।
कृत्य, अत और खलर्थ प्रत्यय भाव और कर्म अर्थ में ही होते हैं।
कृत्संज्ञक प्रत्यय के अन्तर्गत आने के कारण कृत्यप्रत्यय भी पूर्वसूत्र से कर्ता अर्थ में प्राप्त हो रहे थे, उसको बाधकर इस सूत्र ने कहा कि कृत्य-प्रत्यय, क्त-प्रत्यय और खलर्थप्रत्यय भाव और कर्म अर्थ में ही हों। क्त प्रत्यय पूर्वकृदन्तप्रकरण में और खलर्थ प्रत्यय उत्तरकृदन्तप्रकरण में आयेंगे। खल् प्रत्यय जिस अर्थ में होता है, उसी अर्थ में होने वाले प्रत्ययों को खलर्थ प्रत्यय कहते हैं।