कृत्प्रत्ययः कर्तरि स्यात्। इति प्राप्ते-
७६९- कर्तरि कृत्। कर्तरि सप्तम्यन्तं, कृत् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। कृत् प्रत्यय कर्ता अर्थ में होता है।
कृत् प्रत्यय सामान्यतया कर्ता अर्थ में ही होते हैं।
कृदन्त में जितने भी प्रत्यय होते हैं, वे सब किसी एक अर्थविशेष को लेकर के ही होते हैं। अतः यह ध्यान देना कि अमुक प्रत्यय किस अर्थ में हो रहा है। जिस-जिस अर्थ में प्रत्यय होते हैं, उन-उन स्थलों पर उस अर्थ का द्योतन करते हैं। कर्ता अर्थ में होना यह सामान्य विधान है। तत्तत् जगहों पर विशेष सूत्रों के द्वारा अन्य अर्थों में भी प्रत्यय किये जायेंगे जो इस सूत्र के बाधक होंगे। इसका बाधक अग्रिम सूत्र है।