वर्तमाने ये प्रत्यया उक्तास्ते वर्तमानसामीप्ये भूते भविष्यति च वा स्युः।
कदागतोऽसि। अयमागच्छामि, अयमागमं वा।
कदा गमिष्यसि। एष गच्छामि, गमिष्यामि वा।
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७६४- वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा। समीपम् एव सामीप्यम्, वर्तमानस्य सामीप्यं वर्तमानसामीप्यं,
तस्मिन्। वर्तमानेन तुल्यं वर्तमानवत्। वर्तमानसामीप्ये सप्तम्यन्तं, वर्तमानवत् अव्ययपदं, वा अव्ययपदं, त्रिपदं सूत्रम्।
वर्तमान काल में जो प्रत्यय जिस अर्थ में कहे गये हैं, वे प्रत्यय वर्तमान काल के समीपवर्ती भूत और भविष्यत् काल में भी होते हैं विकल्प से।
वर्तमान काल के समीप भूत काल भी हो सकता है और भविष्यत् काल भी।
कदागतोऽसि, अयमागच्छामि, अयमागमं वा। यह वर्तमान के समीप भूत काल का उदाहरण है। किसी ने पूछा- कब आये हो? इस तरह से भूतकाल का प्रश्न हुआ तो उत्तर देने वाला व्यक्ति कुछ पहले ही आ चुका है किन्तु वह उत्तर देता है कि यह आ ही रहा हूँ। वह वर्तमान काल में उत्तर देता है। इस तरह वर्तमान के समीप भूत काल में भी वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा से लट् लकार का ही विधान हुआ। यह विधान वैकल्पिक है, अतः एक पक्ष भूत काल का ही लुङ् लकार हुआ- अयम् आगमम्।
कदा गमिष्यसि? एष गच्छामि, गमिष्यामि वा। यह वर्तमान के समीप भविष्यत् काल का उदाहरण है। किसी ने पूछा- कब जाओगे? इस तरह से भविष्यत्काल का प्रश्न हुआ तो उत्तर देने वाला व्यक्ति कुछ क्षण बाद जायेगा किन्तु वह उत्तर देता है कि यह जा ही रहा हूँ। वह वर्तमान काल में उत्तर देता है। इस तरह वर्तमान के समीप भविष्यत् काल में भी वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा से लट् लकार का ही विधान हुआ। यह विधान वैकल्पिक है, अतः एक पक्ष में भविष्यत् काल का ही लुङ् लकार हुआ- एष गमिष्यामि।