Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 30
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VṛttiGovind
LSK 753
चिण्वद्भावादिविधायकमतिदेशसूत्रम्
स्यसिच्सीयुट्तासिषु भावकर्मणोरुपदेशेऽज्झनग्रहदृशां वा चिण्वदिट् च
Aṣṭādhyāyī 6.4.62
Vṛtti Varadarājācārya

उपदेशे योऽच् तदन्तानां हनादीनाञ्च चिणीवाङ्गकार्यं वा स्यात् स्यादिषु

भावकर्मणोर्गम्यमानयोः स्यादीनामिडागमश्च। चिण्वद्भावपक्षेऽयमिट्।

चिण्वद्भावाद् वृद्धिः। भाविता, भविता। भाविष्यते। भविष्यते। भूयताम्।

अभूयत। भाविषीष्ट, भविषीष्ट।।

.....

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

७५३- स्यसिच्सीयुट्तासिषु भावकर्मणोरुपदेशेऽज्झनग्रहदृशां वा चिण्वदिट् च। स्यश्च

सिच्च सीयुट् च, तासिश्च तेषामितरेतयोगद्वन्द्वः स्यसिच्सीयुट्तासयः, तेषु स्यसिच्सीयुट्तासिषु।

भावश्च कर्म च, भावकर्मणी, तयोर्भावकर्मणोः। अच्च, हनश्च ग्रहश्च दृश् च तेषामितरेतरद्वन्द्वः-

अज्झनग्रहदृशस्तेषामज्झनग्रहदृशाम्। चिणि इव चिद्वत्। स्यसिच्सीयुट्तासिषु सप्तम्यन्तं, भावकर्मणोः

सप्तम्यन्तं, उपदेशे सप्तम्यन्तम्, अज्झनग्रहदृशां षष्ठ्यन्तं, वा अव्ययपदं, चिण्वत् अव्ययपदम्,

इद् प्रथमान्तं, च अव्ययपदम्, अनेकपदमिदं सूत्रम्।

भाव या कर्म अर्थ गम्यमान होने पर उपदेश अवस्था में अजन्त धातुओं एवं

हन्, ग्रह्, और दृश् धातुओं को स्य, सिच्, सीयुट् और तासि के परे रहते विकल्प से

चिण्वद्भाव होता है तथा चिण्वत् के पक्ष में स्य आदिओं को इट् का आगम भी होता

है।

चिण्वद्भाव का तात्पर्य चिण् प्रत्यय के परे होने पर जो कार्य हो सकते हैं, वे

कार्य इन धातुओं में भी हों। चिण् के परे होने पर होने वाले कार्य हैं- अचो ञ्णिति और

अत उपधायाः से होने वाली वृद्धि, आतो युक् चिण्कृतोः से युक् का आगम, हो

हन्तेर्णिन्नेषु से हन् को कुत्व, चिण्णमुलोर्दीर्घोऽन्यतरस्याम् से उपधा को वैकल्पिक दीर्घ

आदि।

भाविता, भविता। लुट् में भू+तास्+त है। भू अजन्त है। अतः स्यसिच्सीयुट्तासिषु

भावकर्मणोरुपदेशेऽज्झनग्रहदृशां वा चिण्वदिट् च से चिण्वद्भाव और तास् को इट् का

आगम हुआ- भू+इ+तास्+त बना। चिण्वद्भाव होने से भू को अचो ञ्णिति से औकार वृद्धि

हुई, भौ+इ+तास्+त बना। आव् आदेश होकर भावितास्+त बना। त को लुटः प्रथमस्य

डारौरसः से डा आदेश, डित् होने के कारण तास् में टिसंज्ञक आस् का लोप होने पर भावित्+आ बना। वर्णसम्मेलन होने पर भाविता सिद्ध हुआ। चिण्वद्भाव न होने के पक्ष में आर्धधातुकस्येड्वलादेः से इट् होकर भविता बनता है। त्वया मया अन्यैश्च श्वो भाविता भविता वा= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से कल होगा।

इसी तरह लृट् में चिण्वद्भाव पक्ष में भाविष्यते, चिण्वद्भावाभाव पक्ष में भविष्यते बनते हैं। त्वया मया अन्यैश्च भाविष्यते भविष्यते वा= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से होगा।

लोट् में- भूयताम्। त्वया मया अन्यैश्च भूयताम्= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से हो।

लङ् में- अभूयत। त्वया मया अन्यैश्च ह्योऽभूयत= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से कल हुआ था।

विधिलिङ् में- भूयेत, त्वया मया अन्यैश्च भूयेत= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से होना चाहिए।

आशीर्लिङ् में- चिण्वद्भाव पक्ष में भाविषीष्ट और चिण्वद्भावाभाव पक्ष में भविषीष्ट। त्वया मया अन्यैश्च भाविषीष्ट भविषीष्ट वा= तुम्हारे मेरे या अन्य किसी से हो। (आशीर्वाद)।