Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 28
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VṛttiGovind
LSK 733
आत्मनेपदविधायकं विधिसूत्रम्
नेर्विशः
Aṣṭādhyāyī 1.3.17
Vṛtti Varadarājācārya

निविशते।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

७३३- नेर्विशः। नेः पञ्चम्यन्तं, विशः पञ्चम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। अनुदात्तङ्कित आत्मनेपदम् से आत्मनेपदम् की अनुवृत्ति आती है।

नि उपसर्ग पूर्वक विश् धातु से आत्मनेपद होता है।

केवल एक ही विश् धातु जो नि उपसर्ग से परे हो तभी यह सूत्र लगता है।

निविशते। विश् धातु तुदादिगण में परस्मैपदी है किन्तु नि उपसर्ग के योग में नेर्विशः से आत्मनेपद का विधान हुआ- निविशते।