Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 24
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VṛttiGovind
LSK 713
यङ्विधानार्थं नियमसूत्रम्
नित्यं कौटिल्ये गतौ
Aṣṭādhyāyī 3.1.23
Vṛtti Varadarājācārya

गत्यर्थात् कौटिल्य एव यङ् स्यात्र तु क्रियासमभिहारे।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

७१३- नित्यं कौटिल्ये गतौ। नित्यं द्वितीयान्तं क्रियाविशेषणम्। कौटिल्ये सप्तम्यन्तं, गतौ

सप्तम्यन्तं, त्रिपदं सूत्रम्। धातोरेकाचो हलादेः क्रियासमभिहारे यङ् से धातोः और यङ्

की अनुवृत्ति आती है।

गत्यर्थक धातु से कुटिलगमन ( टेढ़ा चलना ) अर्थ द्योतित होने पर ही धातु

से यङ् होता है अर्थात् क्रियासमभिहार अर्थ में नहीं होता।

धातोरेकाचो हलादेः क्रियासमभिहारे यङ् से क्रियासमभिहार अर्थ में सभी

हलादि धातुओं से प्राप्त यङ् को गत्यर्थक धातु से कुटिलता से जाना अर्थ होने ही हो,

इसके लिए यह सूत्र बनाया गया है। अतः पुनःपुनः अतिशयेन गच्छति इस अर्थ में यङ्

नहीं होगा।