Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 23
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VṛttiGovind
LSK 708
दीर्घविधायकं विधिसूत्रम्
अज्झनगमां सनि
Aṣṭādhyāyī 6.4.16
Vṛtti Varadarājācārya

अजन्तानां हन्तेरजादेशगमेश्च दीर्घो झलादौ सनि।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

७०८- अज्झनगमां सनि। अच्च हन् च गम् च तेषामितरेतरद्वन्द्वः- अज्झनगमस्तेषाम्। अज्झनगमां षष्ठ्यन्तं, सनि सप्तम्यन्तं, द्विपदं सूत्रम्। अनुनासिकस्य क्विझलोः क्ङिति से झलि और ढ्लोपे पूर्वस्य दीर्घोऽणः से दीर्घः की अनुवृत्ति आती है। अङ्गस्य का अधिकार है।

अजन्त धातु और हन् तथा अच् के स्थान पर आदेश होने वाली गम् धातु को भी दीर्घ होता है झलादि सन् के परे होने पर।

महाभाष्य के अनुसार यहाँ पर गम्लृ धातु का ग्रहण नहीं है अपितु इण्, इक् आदि के स्थान पर आदेश के रूप में होने वाले गम् को लिया जाता है।