Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 19
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VṛttiGovind
LSK 679
उपधादीर्घनिषेधकं विधिसूत्रम्
न भकुर्छुराम्
Aṣṭādhyāyī 8.2.79
Vṛtti Varadarājācārya

भस्य कुर्छुरोरुपधाया न दीर्घः। कुर्वन्ति।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

६७९- न भकुर्छुराम्। भञ्च कुर्च छुर्च तेषामितरेतरयोगद्वन्द्वो भकुर्छुर:, तेषां भकुर्छुराम्। न अव्ययपदं, भकुर्छुराम् षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। वोरुपधाया दीर्घ इक: से उपधाया: और दीर्घ: की अनुवृत्ति आती है।

भसंज्ञक एवं कुर् और छुर् के उपधा को दीर्घ आदेश नहीं होता है।

हलि च से प्राप्त दीर्घ का यह निषेधविधायक सूत्र है।

कुर्वन्ति। लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन में झि के झकार को अन्त् आदेश, गुण, अकार को उकार आदेश तथा प्रत्यय वाले उकार के स्थान पर इको यणचि से यण् (वकार)करके कुर्+व्+अन्ति बना। हलि च से उपधा को दीर्घ प्राप्त था, न भकुर्छुराम् से निषेध हो गया। वर्णसम्मेलन होकर कुर्वन्ति सिद्ध हुआ। आगे करोषि, कुरुथ:, कुरुथ, करोमि बनाइये।