Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 19
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VṛttiGovind
LSK 674
उ-विधायकं विधिसूत्रम्
तनादिकृञ्भ्य उः
Aṣṭādhyāyī 3.1.79
Vṛtti Varadarājācārya

शपोऽपवादः।

तनोति-तनुते। ततान-तेने। तनितासि-तनितासे। तनिष्यति-तनिष्यते।

तनोतु-तनुताम्। अतनोत्-अतनुत। तनुयात्-तन्वीत। तन्यात्-तनिषीष्ट।

अतानीत्-अतनीत्।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

तनु विस्तारे॥१॥

धातु-प्रकरण में तनादिप्रकरण आठवाँ है। तनु धातु आदि में होने के कारण यह तनादिप्रकरण कहलाता है। जैसे भ्वादि में धातु और प्रत्ययों के बीच में विकरण के रूप में शप्, अदादि में शप् होकर उसका लुक, जुहोत्यादि में शप् होकर श्लु, दिवादि में श्यन् और स्वादि में श्नु, रुधादि में श्नम् होते हैं, उसी प्रकार तनादि में शप् को बाधकर उ होता है।

तनु विस्तारे। तनु धातु विस्तार करना, फैलाना आदि अर्थ में प्रयुक्त होता है। उकार स्वरित है, उकार की इत्संज्ञा होती है, तन् अवशिष्ट रहता है। स्वरितेत् होने के कारण उभयपदी है। यह सेट् अर्थात् तासि आदि में इट् होने वाला धातु है।

६७४- तनादिकृञ्भ्य उः। तनादिकृञ्भ्यः पञ्चम्यन्तम्, उः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में कर्तरि शप् से कर्तरि और सार्वधातुके यक् से सार्वधातुके की अनुवृत्ति आती है।

कर्ता अर्थ में हुए सार्वधातुकसंज्ञक प्रत्यय के परे होने पर तनादिगणपठित धातुओं से और कृञ् धातु से शप् का बाधक उ प्रत्यय होता है।

उ यह विकरण न तो शित् है और न ही पित्। अतः इसकी सार्वधातुकसंज्ञा नहीं होती है किन्तु आर्धधातुकसंज्ञा हो जाती है।

तनोति। तन् से लट्, तिप्, शप् प्राप्त, उसे बाधकर तनादिकृञ्भ्य उः से उ प्रत्यय, तन्+उ+ति बना। ति सार्वधातुक है ही, अतः उसके परे होने पर प्रत्यय के उकार का सार्वधातुकार्धधातुकयोः से गुण होकर तन्+ओ+ति हुआ, वर्णसम्मेलन होकर तनोति बना।।

तिप्, सिप् और मिप् ये पित् हैं, इन्हें छोड़कर अन्य अपित् हैं। अपित् प्रत्ययों को सार्वधातुकमपित् से डित् बना दिये जाने के कारण विडन्ति च से गुण निषेध हो जाता है, जिससे तनुतः आदि रूप बनते हैं। बहुवचन में तनु+अन्ति में इको यणचि से यण् होकर

तन्वन्ति बनता है। वस् और मस् में लोपश्चास्यान्यतरस्यां म्वोः से नु के उकार का विकल्प से लोप होता है। लोट् सिप् में नु से परे हि का उतश्च प्रत्ययादसंयोगपूर्वात् से लोप होता है।

लट् के रूप- परस्मैपद में- तनोति, तनुतः, तन्वन्ति। तनोषि, तनुथः, तनुथ। तनोमि, तन्वः-तनुवः, तन्मः-तनुमः। आत्मनेपद में- तनुते, तन्वाते, तन्वते। तनुषे, तन्वाथे, तनुध्वे। तन्वे, तन्वहे-तनुवहे, तन्महे-तनुमहे।

लिट् में तन् धातु से तिप्, णल्, अ, द्वित्व, हलादिशेष करके ततन्+अ बना। अत उपधायाः से उपधावृद्धि होकर ततान्+अ बना, वर्णसम्मेलन हुआ ततान सिद्ध हुआ। तस्, झि, थस्, थ, वस् और मस् में असंयोगाल्लिट् कित् से कित्व होकर अत एकहल्मध्येऽनादेशादेर्लिटि से अभ्याससंज्ञक पूर्व त का लोप और तन् में तकारोत्तरवर्ती अकार के स्थान पर और सिप् में थलि च सेटि से एत्वाभ्यासलोप होता है। इस प्रकार से रूप बनते हैं- ततान, तेनतुः, तेनुः। तेनिथ, तेनथुः, तेन। ततान-ततन, तेनिव, तेनिम। आत्मनेपद में तो सभी प्रत्ययों में एत्वाभ्यासलोप होता ही है- तेने, तेनाते, तेनिरे। तेनिषे, तेनाथे, तेनिध्वे। तेने, तेनिवहे, तेनिमहे।

लृट् परस्मैपद में- तनिता, तनितारौ, तनितारः। तनितासि, तनितास्थः, तनितास्थ। तनितास्मि, तनितास्वः, तनितास्मः। आत्मनेपद में- तनिता, तनितारौ, तनितारः। तनितासे, तनितासाथे, तनिताध्वे। तनिताहे, तनितास्वहे, तनितास्महे।

लृट् परस्मैपद में- तनिष्यति, तनिष्यतः, तनिष्यन्ति। तनिष्यसि, तनिष्यथः, तनिष्यथ। तनिष्यामि, तनिष्यावः, तनिष्यामः। आत्मनेपद में- तनिष्यते, तनिष्येते, तनिष्यन्ते। तनिष्यसे, तनिष्येथे, तनिष्यध्वे। तनिष्ये, तनिष्यावहे, तनिष्यामहे।

लोट् परस्मैपद में- तनोतु-तनुतात्, तनुताम्, तन्वन्तु। तनुहि-तनुतात्, तनुतम्, तनुत। तनवानि, तनवाव, तनवाम। आत्मनेपद में- तनुताम्, तन्वाताम्, तन्वताम्। तनुष्व, तन्वाथाम्, तनुध्वम्। तनवै, तनवावहै, तनवामहै।

लङ् परस्मैपद में- अतनोत्, अतनुताम्, अतन्वन्। अतनोः, अतनुतम्, अतनुत। अतनवम्, अतन्व-अतनुव, अतन्म-अतनुम। आत्मनेपद में- अतनुत, अतन्वाताम्, अतन्वत। अतनुथाः, अतन्वाथाम्, अतनुध्वम्। अतन्वि, अतन्वहि-अतनुवहि, अतन्महि-अतनुमहि।

विधिलिङ् परस्मैपद में- तनुयात्, तनुयाताम्, तनुयुः। तनुयाः, तनुयातम्, तनुयात। तनुयाम्, तनुयाव, तनुयाम। आत्मनेपद में- तन्वीत, तन्वीयाताम्, तन्वीरन्। तन्वीथाः, तन्वीयाथाम्, तन्वीध्वम्। तन्वीय, तन्वीवहि, तन्वीमहि।

आशीर्लिङ् परस्मैपद में- तन्यात्, तन्यास्ताम्, तन्यासुः। तन्याः, तन्यास्तम्, तन्यास्त। तन्यासम्, तन्यास्व, तन्यास्म। आत्मनेपद में- तनिषीष्ट, तनिषीयास्ताम्, तनिषीरन्। तनिषीष्ठाः, तनिषीयास्थाम्, तनिषीध्वम्। तनिषीय, तनिषीवहि, तनिषीमहि।

लुङ् परस्मैपद में- अतानीत्, अतानिष्ठाम्, अतानिषुः। अतानीः, अतानिष्ठम्,

अतानिष्ठ। अतानिषम्, अतानिष्व, अतानिष्म।