Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 14
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VṛttiGovind
LSK 614
वैकल्पिकहस्वविधायकं विधिसूत्रम्
शॄदॄप्रां ह्रस्वो वा
Aṣṭādhyāyī 7.4.12
Vṛtti Varadarājācārya

एषां लिटि हस्वो वा स्यात्। पप्रतुः।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

६१४- शृद्धप्रां हस्वो वा। शृश्च दृश्च पृश्च तेषामितरेतरद्वन्द्वः शृद्धप्रः, तेषां शृद्धप्राम्। शृद्धप्रां

षष्ठ्यन्तं, हस्वः प्रथमान्तं, वा अव्ययपदं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। दयतेर्दिगि लिटि से लिटि की

अनुवृत्ति आती है।

कित् लिट् के परे होने पर शृ, दृ और पृ धातुओं को विकल्प से हस्व होता

है।

अचश्च इस परिभाषा सूत्र की उपस्थिति से ऋकार को विकल्प से हस्व किया

जाता है।