Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 13
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VṛttiGovind
LSK 581
दीर्घविधायकं विधिसूत्रम्
दीर्घ इणः किति
Aṣṭādhyāyī 7.4.69
Vṛtti Varadarājācārya

इणोऽभ्यासस्य दीर्घः स्यात् किति लिटि। ईयतुः। ईयुः। इययिथ, इयेथ।

एता। एष्यति। एतु। ऐत्। ऐताम्। आयन्। इयात्।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५८१- दीर्घ इणः किति। दीर्घः प्रथमान्तम्, इणः षष्ठ्यन्तं, किति सप्तम्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। अत्र लोपोऽभ्यासस्य से अभ्यासस्य और व्यथो लिटि से लिटि की अनुवृत्ति आती है।

कित् लिट् के परे होने पर इण् धातु के अभ्यास को दीर्घ होता है।

ईयतुः। इ+इ+अतुस् में अतुस् कित् लिट् है। दीर्घ इणः किति से अभ्यास इवर्ण को दीर्घ होकर ई+इ+अतुस् बना। इणो यण् से द्वितीय इकार को यण् होकर यकार हुआ, ई+य्+अतुस् बना। वर्णसम्मेलन होकर ईयतुः सिद्ध हुआ। इसी तरह ईयुः सिद्ध हुआ।

इययिथ, इयेथ। अनिट् धातु होने के कारण थल् में भारद्वाज नियम से वैकल्पिक इट् होगा। द्वित्व, इट् आदि होकर इ+इ+इथ बना है। द्वितीय इकार को आर्धधातुक गुण होकर इ+ए+इथ बना। ए+इथ में एचोऽयवायावः से अय् आदेश होकर इ+अय्+इथ बना। अब अभ्यासस्यासवर्णे से प्रथम इकार को इयङ् होकर इय्+अय्+इथ बना। वर्णसम्मेलन होकर इययिथ सिद्ध हुआ। इट् न होने के पक्ष में इयेथ बनता है। लिट् के रूप- इयाय, ईयतुः, ईयुः, इययिथ-इयेथ, ईयथुः, ईय, इयाय-इयय, ईयिव, ईयिम।

लुट्, लृट् में धातु के इकार को गुण करना है।

लुट्- एता, एतारौ, एतारः, एतासि, एतास्थः, एतास्थ, एतास्मि, एतास्वः, एतास्मः।

लृट्- एष्यति, एष्यतः, एष्यन्ति, एष्यसि, एष्यथः, एष्यथ, एष्यामि, एष्यावः, एष्यामः।

लोट्- इतु-इतात्, इताम्, यन्तु, इहि-इतात्, इतम्, इत, अयानि, अयाव, अयाम।

अजादि धातु होने के कारण लङ् में आट् का आगम होता है। उत्तद्+त् है। आटश्च से वृद्धि होकर ऐत् सिद्ध होता है। यह वृद्धि आट् आगम और धातु के इकार के

बीच का है, अतः कित् और डित् का प्रसंग नहीं है। इस कारण क्ङिति च यह निषेध सूत्र भी नहीं लगता। तीनों पुरुषों के तीनों वचनों में वृद्धि होती है। प्रथमपुरुष के बहुवचन में आ+इ+अन्ति है। इकार का लोप, तकार का संयोगान्तलोप करके आ+इ+अन् बना है। आ+इ में आटश्च से वृद्धि होकर ऐ+अन् बना। ऐकार के स्थान पर आय् आदेश होकर आय्+अन् बना। वर्णसम्मेलन होकर आयन् सिद्ध हुआ।

लङ्- ऐत्, ऐताम्, आयन्, ऐः, ऐतम्, ऐत, आयम्, ऐव, ऐम।

विधिलिङ्- इयात्, इयाताम्, इयुः, इयाः, इयातम्, इयात, इयाम्, इयाव, इयाम।

आशीर्लिङ्- ईयात्, ईयास्ताम्, ईयासुः, ईयाः, ईयास्तम्, ईयास्त, ईयासम्, ईयास्व, ईयास्म। यहाँ पर अकृत्सार्ववधातुकयोर्दीर्घः से दीर्घ हुआ है।