Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 13
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Govind
LSK 564
वधादेशविधायकं सूत्रद्वयम्
हनो वध लिङि
Aṣṭādhyāyī 2.4.42
Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५६४- हनो वध लिङि। हनः षष्ठ्यन्तं, वध लुप्तप्रथमाकं पदं, लिङि सप्तम्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्। आर्धधातुके का अधिकार है।

हन् धातु के स्थान पर वध आदेश होता है आर्धधातुक लिङ् की विवक्षा होने पर।

आर्धधातुके के अधिकार के कारण इस सूत्र से आशीर्लिङ् में ही वध आदेश होता है क्योंकि लिङ्गिणि से आशीर्लिङ् की आर्धधातुकसंज्ञा होती है, विधिलिङ् की नहीं होती।