चङ्परे णौ यदङ्गं तस्योपधाया ह्रस्वः स्यात्।
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५३०- णौ चङ्युपधाया ह्रस्वः। णौ सप्तम्यन्तं, चङि सप्तम्यन्तम्, उपधाया षष्ठ्यन्तं, ह्रस्वः प्रथमान्तम्, अनेकपदमिदं सूत्रम्। अङ्गस्य का अधिकार है।
चङ् के परे होने परे जो णि, उसके परे रहने पर जो अङ्ग, उसकी उपधा को ह्रस्व होता है।
ध्यान रखना कि केवल णि के परे नहीं अपितु णि से भी चङ् परे हो, तभी यह सूत्र प्रवृत्त होता है।