चङि परे अनभ्यासस्य धात्ववयवस्यैकाचः प्रथमस्य द्वे स्तोऽजादेद्वितीयस्य।
सन्वद्भावविधायकमतिदेशसूत्रम्
५३१- चङि। चङि सप्तम्यन्तम् एकपदमिदं सूत्रम्। लिटि धातोरनभ्यासस्य से धातोः और अनभ्यासस्य की अनुवृत्ति और एकाचो द्वे प्रथमस्य, अजादेद्वितीयस्य का अधिकार है।
चङ् के परे होने पर अभ्यासभिन्न धातु के अवयव प्रथम एकाच् को द्वित्व होता है किन्तु यदि धातु अजादि और अनेकाच् हो तो द्वितीय एकाच् को द्वित्व होता है।