Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 524
अत्-इत्यादेशविधायकं विधिसूत्रम्
आत्मनेपदेष्वनतः
Aṣṭādhyāyī 7.1.5
Vṛtti Varadarājācārya

अनकारात्परस्यात्मनेपदेषु झस्य अदित्यादेशः स्यात्।

ऐधिषत। ऐधिष्ठाः। ऐधिषाथाम्। ऐधिद्वम्। ऐधिषि। ऐधिष्वहि।

ऐधिष्महि। ऐधिष्यत। ऐधिष्येताम्। ऐधिष्यन्त। ऐधिष्यथाः। ऐधिष्येथाम्।

ऐधिष्यध्वम्। ऐधिष्ये। ऐधिष्यावहि। ऐधिष्यामहि।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५२४- आत्मनेपदेष्वनतः। न अत् अनत्, तस्मात् अनतः। आत्मनेपदेषु सप्तम्यन्तम्, अनतः पञ्चम्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। ज्ञोऽन्तः से ज्ञः तथा अदभ्यस्तात् से अत् की अनुवृत्ति आती है।

ह्रस्व अकार से भिन्न वर्ण से परे आत्मनेपद के ज्ञकार के स्थान पर अत् आदेश होता है।

अत् में तकार का न विभक्तौ तुस्माः से निषेध होने के कारण इत्संज्ञा नहीं होती है। यह अत् आदेश केवल ज्ञ के स्थान पर हुआ है, ज्ञ (ज्ञ्+अ) सम्पूर्ण के स्थान पर नहीं।

ऐधिषत। एध् धातु से लुङ्, ज्ञ, उसके स्थान पर आत्मनेपदेष्वनतः से अत् आदेश, एध्+अत बना। आट् आगम, च्लि, सिच्, इट् करके आ+एध्+इस्+अत बना है। आ+एध् में वृद्धि हुई और इस् के सकार को पत्व, वर्णसम्मेलन करके ऐधिषत की सिद्धि होती है।

शेष प्रयोगों में भी आट् आगम, च्लि, सिच् आदेश, आर्धधातुकसंज्ञा, इट् आगम, वृद्धि, पत्व आदि होंगे। इस तरह से एध् धातु के लुङ् लकार में निम्नलिखित रूप सिद्ध होते हैं- ऐधिष्ट, ऐधिषाताम्, ऐधिषत। ऐधिष्ठाः, ऐधिषाथाम्, ऐधिद्वम्। ऐधिषि, ऐधिष्वहि, ऐधिष्महि। ऐधिद्वम् में ऐध्+इस्+ध्वम् बन जाने के बाद धि च से सकार का लोप हो जाता है इणः पीध्वंलुङ्लिटां धोऽङ्गात् से ढत्व होता है, क्योंकि ध्वम् प्रत्यय के परे रहते तदादि होने से ऐधिस् की अङ्गसंज्ञा होती है और अब सलोप होने के बाद बचा हुआ ऐधि भी एकदेशविकृतन्याय से अङ्ग ही है और स्वतः इणन्त भी। अतः इणन्त अङ्ग होने से ऐधि इससे परे लुङ् के धकार को ढकार होता है।

ऐधिष्यत। एध् धातु से लुङ् लकार में त, आडजादीनाम् से आट् आगम,

स्यतासी लृलुटोः से स्य, उसकी आर्धधातुकसंज्ञा, आर्धधातुकस्येड् वलादेः से इट् आगम, आ+एध् में आटश्च से वृद्धि और इकार से परे स्य के सकार के स्थान पर आदेशप्रत्यययोः से षत्व कर वर्णसम्मेलन करने पर ऐधिष्यत सिद्ध हो जाता है।

एध् धातु के लृङ्-लकार के रूप- ऐधिष्यत, ऐधिष्येताम्, ऐधिष्यन्त। ऐधिष्यथाः, ऐधिष्येथाम्, ऐधिष्यध्वम्। ऐधिष्ये, ऐधिष्यावहि, ऐधिष्यामहि।

इस प्रकार से आपने भ्वादिप्रकरण में आत्मनेपदी एध् धातु के रूप जान लिया। धातुपाठ के अनुसार भ्वादिगण में लगभग एक हजार धातुएँ हैं, जिसमें एकतिहाई से भी ज्यादा धातुएँ आत्मनेपदी हैं।

लघुसिद्धान्तकौमुदी पढ़ने के बाद छात्रों को वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी का अध्ययन करना है। वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी का पूर्ण ज्ञान तभी हो सकता है, जब आपने अष्टाध्यायी के सारे सूत्र रट लिये हों। सूत्र और वार्तिक मिलाकर चार हजार से ऊपर इनका रटन करना मामूली बात नहीं है। अतः हम आपको बार-बार यही निर्देश दे रहे हैं कि प्रतिमाह एक अध्याय के नियम से अष्टाध्यायी-सूत्रपाठ का पारायण करें। पारायण अर्थात् आवृत्ति करने से शीघ्र कण्ठस्थ हो जाते हैं। आशा है कि आप मेरे निर्देशनों को मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अब एध धातु के सभी रूपों को तालिका में देखते हैं।

लट् लकार

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथमपुरुष

एधते

एधेते

एधन्ते

मध्यमपुरुष

एधसे

एधेथे

एधध्वे

उत्तमपुरुष

एधे

एधावहे

एधामहे

लिट् लकार, कृ का अनुप्रयोग

प्रथमपुरुष

एधाञ्चक्रे

एधाञ्चक्राते

एधाञ्चक्रिरे

मध्यमपुरुष

एधाञ्चकृषे

एधाञ्चक्राथे

एधाञ्चकृढ्वे

उत्तमपुरुष

एधाञ्चक्रे

एधाञ्चकृवहे

एधाञ्चकृमहे

लिट् लकार, भू का अनुप्रयोग

प्रथमपुरुष

एधाम्बभूव

एधाम्बभूवतुः

एधाम्बभूवुः

मध्यमपुरुष

एधाम्बभूविथ

एधाम्बभूवथुः

एधाम्बभूव

उत्तमपुरुष

एधाम्बभूव

एधाम्बभूविव

एधाम्बभूविम

लिट् लकार, अस् का अनुप्रयोग

प्रथमपुरुष

एधामास

एधामासतुः

एधामासुः

मध्यमपुरुष

एधामासिथ

एधामासथुः

एधामास

उत्तमपुरुष

एधामास

एधामासिव

एधामासिम

लुट् लकार

प्रथमपुरुष

एधिता

एधितारौ

एधितारः

मध्यमपुरुष

एधितासे

एधितासाथे

एधिताध्वे

उत्तमपुरुष

एधिताहे

एधितास्वहे

एधितास्महे

लृट् लकार

प्रथमपुरुष

एधिष्यते

एधिष्येते

एधिष्यन्ते

मध्यमपुरुष

एधिष्यसे

एधिष्येथे

एधिष्यध्वे

उत्तमपुरुष

एधिष्ये

एधिष्यावहे

एधिष्यामहे

लोट् लकार

प्रथमपुरुष

एधताम्

एधेताम्

एधन्ताम्

मध्यमपुरुष

एधस्व

एधेथाम्

एधध्वम्

उत्तमपुरुष

एधै

एधावहै

एधामहै

लङ् लकार

प्रथमपुरुष

ऐधेत

ऐधेताम्

ऐधन्त

मध्यमपुरुष

ऐधेथाः

ऐधेथाम्

ऐधध्वम्

उत्तमपुरुष

ऐधे

ऐधावहि

ऐधामहि

विधिलिङ् लकार

प्रथमपुरुष

ऐधेत

ऐधेयातम्

ऐधेरन्

मध्यमपुरुष

ऐधेथाः

ऐधेयाथाम्

ऐधेध्वम्

उत्तमपुरुष

ऐधेय

ऐधेवहि

ऐधेमहि

आशीर्लिङ् लकार

प्रथमपुरुष

एधिषीष्ट

एधिषीयास्ताम्

एधिषीरन्

मध्यमपुरुष

एधिषीष्ठाः

एधिषीयास्थाम्

एधिषीध्वम्

उत्तमपुरुष

एधिषीय

एधिषीवहि

एधिषीमहि

लृङ् लकार

प्रथमपुरुष

ऐधिष्ट

ऐधिषाताम्

ऐधिषत

मध्यमपुरुष

ऐधिष्ठाः

ऐधियाथाम्

ऐधिढ्वम्

उत्तमपुरुष

ऐधिषि

ऐधिष्वहि

ऐधिष्महि

लृङ् लकार

प्रथमपुरुष

ऐधिष्यत

ऐधिष्येताम्

ऐधिष्यन्त

मध्यमपुरुष

ऐधिष्यथाः

ऐधिष्येथाम्

ऐधिष्यध्वम्

उत्तमपुरुष

ऐधिष्ये

ऐधिष्यावहि

ऐधिष्यामहि।