Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 518
वामादेशविधायकं विधिसूत्रम्
सवाभ्यां वामौ
Aṣṭādhyāyī 3.4.91
Vṛtti Varadarājācārya

सवाभ्यां परस्य लोडेतः क्रमाद् वामौ स्तः।

एधस्व। एधेथाम्। एधध्वम्।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५१८- सवाभ्यां वामौ। सश्च वश्च तयोरितरेतरद्वन्द्वः सवौ, ताभ्यां सवाभ्याम्। वश्च अम् च तयोरितरेतरद्वन्द्वः वामौ। सवाभ्यां पञ्चम्यन्तं, वामौ प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। लोटो लङ्वत् से लोटः और आमेतः से एतः की अनुवृत्ति आती है।

स और व से परे लोट् लकार के एकार के स्थान पर स्थान पर क्रम से व और अम् आदेश होता है।

यहाँ पर निमित्त भी दो है स् और व् तथा आदेश भी दो हैं- व और अम्। अतः यथासंख्यामनुदेशः समानाम् के नियमानुसार क्रम से होगा अर्थात् सकार से पर एकार के स्थान पर व आदेश और वकार से पर एकार के स्थान पर अम् आदेश।

एधस्व। एध् धातु से लोट् लकार, थास् आदेश, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्ध लोप, एध् अ थास् बना है। थासः से से थास् के स्थान पर से आदेश होने पर से के सकार से परे एकार के स्थान पर सवाभ्यां वामौ से व आदेश हुआ- एध् अ स् व बना, वर्णसम्मेलन हुआ- एधस्व सिद्ध हुआ।

एधेथाम्। एध् धातु से लोट् लकार, आथाम् आदेश, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ आथाम् बना है। आतो डितः से आथाम् के आकार के स्थान पर इय् आदेश हुआ- एध् अ इय् आथाम् बना। यकार का लोपो व्योर्वलि से लोप हुआ। एध् अ इ थाम् बना। अ+इ में आद्गुणः से गुण हुआ, ए बना। एध् ए थाम् में वर्णसम्मेलन हुआ- एधेथाम् बना। एधेथाम् में अन्त्य अच् थाम् में आम् है। अतः मकार सहित आ अर्थात् आम् की अचोऽन्त्यादि टि से टिसंज्ञा हुई और टि के स्थान पर टित आत्मनेपदानां टेरेः से एत्व हुआ- एधेथे बना। थे के एकार के स्थान पर आमेतः से आम् आदेश हुआ- एधेथाम्।

एधध्वम्। एध् धातु से लोट् लकार, ध्वम् आदेश, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ ध्वम् बना। ध्वम् में अम् की टिसंज्ञा और उसके स्थान टित आत्मनेपदानां टेरे से एत्व करके एध् अ ध्वे बना। ध्वे में वकार से परे एकार के स्थान पर सवाभ्यां वामौ से अम् आदेश हुआ- एध् अ ध्वम् बना, वर्णसम्मेलन हुआ- एधध्वम् सिद्ध हुआ।