लोट एकारस्याम् स्यात्। एधताम्, एधेताम्, एधन्ताम्।
५१७- आमेतः। आम् प्रथमान्तम्, एतः षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। लोटो लङ्वत् से लोटः की अनुवृत्ति आती है।
लोट् लकार के एकार के स्थान पर आम् आदेश होता है।
एधताम्। एध् धातु से लोट् लकार, त आदेश, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ त बना, त के टि को एत्व और वर्णसम्मेलन करके एधते बना। ते के एकार के स्थान पर इस सूत्र से आम् आदेश हुआ- एधताम्।
एधेताम्। एध् धातु से लोट् लकार, आताम् आदेश, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ आताम् बना, आतो ङितः से आताम् के आकार के स्थान पर इय् आदेश हुआ- एध् अ इय् ताम् बना। यकार का लोपो व्योर्वलि से लोप हुआ। एध् अ इ ताम् बना। अ+इ में आद्गुणः से गुण हुआ, ए बना। एध् ए ताम् में वर्णसम्मेलन हुआ- एधेताम् बना। एधेताम् में अन्त्य अच् ताम् में आम् है। अतः मकार सहित आ अर्थात् आम् की अचोऽन्त्यादि टि से टिसंज्ञा हुई और टि के स्थान पर टित आत्मनेपदानां टेरेः से एत्व हुआ- एधेते बना। ते के एकार के स्थान पर इस सूत्र से आम् आदेश हुआ- एधेताम्।
एधन्ताम्। एध् धातु से लोट् लकार, झ आदेश, झ के स्थान पर झोऽन्तः से झ के स्थान पर अन्त् आदेश, एध् अन्त बना। सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, एध् अ अन्त बना। अ+अन्त में अतो गुणे से पररूप करके अन्त बना, एध्+अन्त हुआ। अन्त में के टिसंज्ञक अकार के स्थान पर एत्व और वर्णसम्मेलन करके एधन्ते बना। ते के एकार के स्थान पर इस सूत्र से आम् आदेश हुआ- एधन्ताम्।