Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 516
हकारादेशविधायकं विधिसूत्रम्
ह एति
Aṣṭādhyāyī 7.4.52
Vṛtti Varadarājācārya

तासस्त्योः सस्य हः स्यादेति परे।

एधिताहे। एधितास्वहे। एधितास्महे। एधिष्यते। एधिष्येते। एधिष्यन्ते।

एधिष्यसे। एधिष्येथे। एधिष्यध्वे। एधिष्ये। एधिष्यावहे। एधिष्यामहे।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

५१६- ह एति। हः प्रथमान्तम्, एति सप्तम्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में तासस्त्योर्लोपः से तासस्त्योः और सः स्यार्थधातुके से सः की अनुवृत्ति आती है।

एकार के परे रहने पर तास् और अस् धातु के सकार के स्थान पर हकार आदेश होता है।

एधिताहे। एध्-धातु से लुट् लकार, एध् लुट्, उत्तमपुरुष का एकवचन इट्, एध् इट्, एध् इ, एध् तास् इ, एध् इतास् इ, एधितास् इ, टिसंज्ञक इ के स्थान पर टित

आत्मनेपदानां टेरे से एत्व करके एधितास् ए बना, एकार के परे होने पर ह एति से सकार के स्थान पर हकार आदेश हुआ- एधिताह् ए बना, वर्णसम्मेलन करके एधिताहे सिद्ध हुआ।

एधितास्वहे। एधितास्महे। उत्तमपुरुष के द्विवचन और बहुवचन में तासि, इट् का आगम, वहि और महि में टित आत्मनेपदानां टेरे से एत्व करके उक्त रूप बन जाते हैं।

इस प्रकार से एध् धातु के लुट् लकार के रूप निम्नानुसार हुए- एधिता, एधितारौ, एधितारः। एधितासे, एधितासाथे, एधिताध्वे, एधिताहे, एधितास्वहे, एधितास्महे।

लुट्-लकार में स्य और इट् का आगम, इकार से परे स्य के सकार को एत्व करके बनाइये- एधिष्यते, एधिष्येते, एधिष्यन्ते, एधिष्यसे, एधिष्येथे, एधिष्यध्वे, एधिष्ये, एधिष्यावहे, एधिष्यामहे।