Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 488
औकारादेशविधायकं विधिसूत्रम्
आत औ णलः
Aṣṭādhyāyī 7.1.34
Vṛtti Varadarājācārya

आदन्ताद्धातोर्णल औकारादेशः स्यात्। पपौ।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४८८- आत औ णलः। आतः पञ्चम्यन्तम्, औ लुप्तप्रथमाकं, णलः षष्ठ्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्।

आकारान्त धातु से परे लिट् लकार के णल् के स्थान पर औकार आदेश होता है।

पपौ। पा धातु से लिट् लकार, तिप् आदेश, उसके स्थान पर णल् आदेश करके पा अ बना। शकार-इत्संज्ञक प्रत्यय के अभाव में पिब आदेश नहीं हुआ। आत औ णलः से णल् के अकार के स्थान पर औकार आदेश हुआ- पा औ बना। पा का द्वित्व, पा पा औ, एक ही हल् है, अतः हलादि शेष की कोई आवश्यकता नहीं। ह्रस्वः से प्रथम पा के आकार को ह्रस्व हुआ पपा+औ में वृद्धिरेचि से वृद्धि होकर पपौ बना।