उपधाया अतो वृद्धिः स्यात् जिति णिति च प्रत्यये परे।
जगाद। जगदतुः। जगदुः। जगदिथ। जगदथुः। जगद।
उपधाया अतो वृद्धिः स्यात् जिति णिति च प्रत्यये परे।
जगाद। जगदतुः। जगदुः। जगदिथ। जगदथुः। जगद।
उपधाया अतो वृद्धिः स्यात् जिति णिति च प्रत्यये परे।
जगाद। जगदतुः। जगदुः। जगदिथ। जगदथुः। जगद।
४५५- अत उपधायाः। अतः षष्ठ्यन्तम्, उपधायाः षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में मृजेर्वृद्धिः से वृद्धिः तथा अचो ञ्णिति से ञ्णिति की अनुवृत्ति आती है।
जित् और णित् प्रत्यय के परे रहने पर उपधाभूत ह्रस्व अकार की वृद्धि होती है।
जगाद। गद् से लिट्, तिप्, णल्, अ, गद्+अ में द्वित्व, अभ्याससंज्ञा, हलादिशेष करने पर ग+गद्+अ बना। अभ्यास के कवर्ग गकार के स्थान पर कुहोश्चुः से चवर्ग आदेश
४५५- अत उपधायाः। अतः षष्ठ्यन्तम्, उपधायाः षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में मृजेर्वृद्धिः से वृद्धिः तथा अचो ञ्णिति से ञ्णिति की अनुवृत्ति आती है।
जित् और णित् प्रत्यय के परे रहने पर उपधाभूत ह्रस्व अकार की वृद्धि होती है।
जगाद। गद् से लिट्, तिप्, णल्, अ, गद्+अ में द्वित्व, अभ्याससंज्ञा, हलादिशेष करने पर ग+गद्+अ बना। अभ्यास के कवर्ग गकार के स्थान पर कुहोश्चुः से चवर्ग आदेश
४५५- अत उपधायाः। अतः षष्ठ्यन्तम्, उपधायाः षष्ठ्यन्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में मृजेर्वृद्धिः से वृद्धिः तथा अचो ञ्णिति से ञ्णिति की अनुवृत्ति आती है।
जित् और णित् प्रत्यय के परे रहने पर उपधाभूत ह्रस्व अकार की वृद्धि होती है।
जगाद। गद से लिट्, तिप्, णल्, अ, गद्+अ में द्वित्व, अभ्याससंज्ञा, हलादिशेष करने पर ग+गद्+अ बना। अभ्यास के कवर्ग गकार के स्थान पर कुहोश्चुः से चवर्ग आदेश