Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
Show
VṛttiGovind
LSK 424
लोपविधायकं विधिसूत्रम्
इतश्च
Aṣṭādhyāyī 3.4.100
Vṛtti Varadarājācārya

डितो लस्य परस्मैपदमिकारान्तं यत्तदन्तस्य लोपः।

अभवत्। अभवताम्। अभवन्। अभवः। अभवतम्। अभवत।

अभवम्। अभवाव। अभवाम।

.....

डितो लस्य परस्मैपदमिकारान्तं यत्तदन्तस्य लोपः।

अभवत्। अभवताम्। अभवन्। अभवः। अभवतम्। अभवत।

अभवम्। अभवाव। अभवाम।

.....

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४२४- इतश्च। इतः षष्ठ्यन्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में नित्यं डितः से डितः तथा इतश्च लोपः परस्मैपदेषु से लोपः परस्मैपदेषु की अनुवृत्ति आती है।

.....

डित् लकार के स्थान पर जो परस्मैपद ह्रस्व इकारान्त, उस के अन्त्य( इकार )

का लोप होता है।

अभवत्। भू धातु से अनद्यतन भूतकाल अर्थ में अनद्यतने लड् से लड् लकार,

लुङ्लङ्लृङ्क्ष्वडुदात्तः से धातु को अट् का आगम, अनुबन्धलोप, प्रथमपुरुष का एकवचन

तिप् आदेश, अनुबन्धलोप होकर अभू ति बना। ति की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप,

अभू अ ति में सार्वधातुकार्धधातुकयोः से भू का गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ-

अभवति बना। ति में इकार का इतश्च से लोप हुआ- अभवत् बना।

अभवताम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट् आगम, प्रथमपुरुष का

द्विवचन तस्, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+तस् बना।

तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से तस् के स्थान पर ताम् आदेश होकर अभवताम् सिद्ध हुआ।

अभवन्। भू से लड्, अट् आगम, झि, अन्त् आदेश, अभू अन्ति, शप्, अभू अ

अन्ति, गुण, अवादेश, अभव अन्ति, अतो गुणो से पररूप, अभवन्ति, ति के इकार का

इतश्च से लोप और तकार का संयोगान्तस्य लोपः से लोप होकर अभवन् सिद्ध हुआ।

अभवः। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट् आगम, अनुबन्धलोप,

उसके स्थान पर मध्यमपुरुष का एकवचन सिप् आदेश, अनुबन्धलोप, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्,

अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+सि बना। इकार का इतश्च से लोप होकर

अभवस् बना। सकार का रुत्वविसर्ग हुआ- अभवः।

अभवतम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट्, मध्यमपुरुष का

द्विवचन थस्, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+थस् बना।

तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से थस् के स्थान पर तम् आदेश होकर अभवतम्।

अभवत। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट्, मध्यमपुरुष का बहुवचन

थ, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+थ बना। तस्थस्थमिपां

तान्तन्तामः से थ के स्थान पर त आदेश होकर अभवत।

अभवम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट् आगम, उत्तममपुरुष का

एकवचन मिप्, अनुबन्धलोप, अट् का आगम, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण,

अवादेश, तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से मि के स्थान पर अम् आदेश, अभव अम् बना। अतो

गुणो से पररूप होकर अभवम् सिद्ध हुआ।

अभवाव। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, लुङ्लङ्लृङ्क्ष्वडुदात्तः

से धातु को अट् आगम, अनुबन्धलोप, उत्तममपुरुष का द्विवचन वस् आदेश होकर अभू वस्

बना। सि की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, अभू अ वस् में सार्वधातुकार्धधातुकयोः

से भू को गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ- अभव वस् बना। अतो दीर्घो यजि से

दीर्घ होकर अभवावस् बना। सकार का नित्यं डितः से लोप हुआ- अभवाव।

अभवाम। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, लुङ्लङ्लृङ्क्ष्वडुदात्तः

से धातु को अट् आगम, अनुबन्धलोप, उत्तममपुरुष का बहुवचन मस् आदेश होकर अभू मस्

बना। सि की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, अभू अ मस् में सार्वधातुकार्धधातुकयोः

से भू को गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ- अभव मस् बना। अतो दीर्घो यजि से

दीर्घ होकर अभवामस् बना। सकार का नित्यं डितः से लोप हुआ- अभवाम।

४२४- इतश्च। इतः षष्ठ्यन्तं, च अव्ययपदं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में नित्यं डितः से डितः तथा इतश्च लोपः परस्मैपदेषु से लोपः परस्मैपदेषु की अनुवृत्ति आती है।

..... डित् लकार के स्थान पर जो परस्मैपद ह्रस्व इकारान्त, उस के अन्त्य( इकार )

का लोप होता है।

अभवत्। भू धातु से अनद्यतन भूतकाल अर्थ में अनद्यतने लड् से लड् लकार,

लुड्लड्लृड्क्ष्वडुदात्तः से धातु को अट् का आगम, अनुबन्धलोप, प्रथमपुरुष का एकवचन

तिप् आदेश, अनुबन्धलोप होकर अभू ति बना। ति की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप,

अभू अ ति में सार्वधातुकार्धधातुकयोः से भू का गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ-

अभवति बना। ति में इकार का इतश्च से लोप हुआ- अभवत् बना।

अभवताम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड्लकार, अट् आगम, प्रथमपुरुष का

द्विवचन तस्, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+तस् बना।

तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से तस् के स्थान पर ताम् आदेश होकर अभवताम् सिद्ध हुआ।

अभवन्। भू से लड्, अट् आगम, झि, अन्त् आदेश, अभू अन्ति, शप्, अभू अ

अन्ति, गुण, अवादेश, अभव अन्ति, अतो गुणे से पररूप, अभवन्ति, ति के इकार का

इतश्च से लोप और तकार का संयोगान्तस्य लोपः से लोप होकर अभवन् सिद्ध हुआ।

अभवः। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, अट् आगम, अनुबन्धलोप,

उसके स्थान पर मध्यमपुरुष का एकवचन सिप् आदेश, अनुबन्धलोप, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्,

अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+सि बना। इकार का इतश्च से लोप होकर

अभवस् बना। सकार का रुत्वविसर्ग हुआ- अभवः।

अभवतम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड्लकार, अट्, मध्यमपुरुष का

द्विवचन थस्, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+थस् बना।

तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से थस् के स्थान पर तम् आदेश होकर अभवतम्।

अभवत। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड्लकार, अट्, मध्यमपुरुष का बहुवचन

थ, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण, अवादेश होकर अभव+थ बना। तस्थस्थमिपां

तान्तन्तामः से थ के स्थान पर त आदेश होकर अभवत।

अभवम्। भूधातु से अनद्यतने लड् से लड्लकार, अट् आगम, उत्तममपुरुष का

एकवचन मिप्, अनुबन्धलोप, अट् का आगम, सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, गुण,

अवादेश, तस्थस्थमिपां तान्तन्तामः से मि के स्थान पर अम् आदेश, अभव अम् बना। अतो

गुणे से पररूप होकर अभवम् सिद्ध हुआ।

अभवाव। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, लुड्लड्लृड्क्ष्वडुदात्तः

से धातु को अट् आगम, अनुबन्धलोप, उत्तममपुरुष का द्विवचन वस् आदेश होकर अभू वस्

बना। सि की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, अभू अ वस् में सार्वधातुकार्धधातुकयोः

से भू को गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ- अभव वस् बना। अतो दीर्घो यजि से

दीर्घ होकर अभवावस् बना। सकार का नित्यं डितः से लोप हुआ- अभवाव।

अभवाम। भू धातु से अनद्यतने लड् से लड् लकार, लुड्लड्लृड्क्ष्वडुदात्तः

से धातु को अट् आगम, अनुबन्धलोप, उत्तममपुरुष का बहुवचन मस् आदेश होकर अभू मस्

बना। सि की सार्वधातुकसंज्ञा, शप्, अनुबन्धलोप, अभू अ मस् में सार्वधातुकार्धधातुकयोः

से भू को गुण, अवादेश होकर वर्णसम्मेलन हुआ- अभव मस् बना। अतो दीर्घो यजि से

दीर्घ होकर अभवामस् बना। सकार का नित्यं डितः से लोप हुआ- अभवाम।