Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 401
इडागमविधायकं विधिसूत्रम्
आर्धधातुकस्येड् वलादेः
Aṣṭādhyāyī 7.2.35
Vṛtti Varadarājācārya

वलादेरार्धधातुकस्येडागमः स्यात्।

बभूविथ। बभूवथुः। बभूव। बभूव। बभूविव। बभूविम।

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Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

४०१- आर्धधातुकस्येड्वलादेः। वल् आदौ यस्य स वलादिः, तस्य वलादेः। आर्धधातुकस्य षष्ठ्यन्तम्, इट् प्रथमान्तं, वलादेः षष्ठ्यन्तं, त्रिपदमिदं सूत्रम्।

वल् प्रत्याहार वाला वर्ण आदि में हो, ऐसे आर्धधातुक को इट् का आगम होता है।

टकार की इत्संज्ञा होती है और टित् होने के कारण यह आर्धधातुक के आदि में आकर बैठता है।

बभूविथ। बभूवथुः। बभूव। बभूव। बभूविव। बभूविम। भू धातु से कर्ता अर्थ और परोक्ष, अनद्यतन, भूत काल में परोक्षे लिट् से लिट् लकार हुआ, अनुबन्धलोप हुआ, उसके स्थान पर तिप् आदि आदेश प्राप्त हुए। प्रथमपुरुषादि संज्ञा, मध्यमपुरुष के एकवचन की प्राप्ति, सिप् आया, भू+सिप् बना। पकार का लोप। यहाँ सि की सार्वधातुकसंज्ञा नहीं होती है क्योंकि लिट् च से सार्वधातुकसंज्ञा को बाधकर लिट् लकार की आर्धधातुकसंज्ञा हो जाती है। अतः कर्तरि शप् से शप् भी नहीं हुआ। सि के स्थान पर परस्मैपदानां णलतुसुस्थलथुसणल्वमाः से थल् आदेश हुआ, अनुबन्धलोप, भू थ बना। आर्धधातुकस्येड्वलादेः से वलादि आर्धधातुक थ को इट् आगम हुआ, टकार की इत्संज्ञा और लोप हुआ, इ बचा। टित् होने के कारण थ के आदि में बैठा, भू इ थ बना। अब यह अजादि बना तो भुवो वुग् लुङ्लिटोः से भू को वुक् आगम हुआ, अनुबन्धलोप होकर व् बचा, कित् होने पर भू के अन्त में बैठा, भूव् इ थ बना। लिटि धातोरनभ्यासस्य से भूव् को द्वित्व हुआ, भूव् भूव् इ थ बना। पूर्वोऽभ्यासः से पहले वाले भूव् की अभ्याससंज्ञा हुई और हलादि शेषः से अभ्याससंज्ञक भूव् में भ् जो आदि हल् है, उसका शेष और अन्य हल् वकार का लोप हुआ, भू भूव् इ थ बना। ह्रस्वः से अभ्याससंज्ञक भू के ऊकार को ह्रस्व होकर भु हुआ, भु भूव् इ थ बना। भवतेरः से भु के उकार के स्थान पर अकार आदेश हुआ, भ भूव् इ थ बना। अभ्यासे चर्च से झश् भकार के स्थान पर जश् बकार आदेश हुआ, बभूव् इ थ बना, वर्णसम्मेलन हुआ- बभूविथ बना।

अब इसी प्रकार मध्यमपुरुष के द्विवचन के थस् के स्थान पर अथुस् आदेश होकर बभूवतुः के समान बभूवथुः बनेगा।

मध्यमपुरुष के बहुवचन में अ आदेश होकर णल् के ही समान बभूव और उत्तमपुरुष के एकवचन में भी णल् आदेश होकर बभूव बना। उत्तमपुरुष के द्विवचन में व आदेश होकर बभूविव और बहुवचन में म आदेश होकर बभूविम बनेंगे। यहाँ पर यह ध्यान देना होगा कि यदि वल् प्रत्याहार आगे है तो इट् का आगम होगा और नहीं तो इट् आगम नहीं होगा। वुक् आगम करने के लिए अच् परे होना जरूरी है। लिट् में जहाँ प्रत्यय या आदेश अच् नहीं है, वहाँ पर इट् आगम होने के बाद अच् परे मिल जाता है।