भविष्यत्यनद्यतनेऽर्थे धातोर्लुट्।
४०२- अनद्यतने लुट्। अनद्यतने सप्तम्यन्तं, लुट् प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। भविष्यति गम्यादयः से भविष्यति की अनुवृत्ति आती है।
अनद्यतन भविष्यत् अर्थ में धातु से लुट् लकार होता है।
आने वाले समय को भविष्यत् कहते हैं। जो आज का है, उसे अद्यतन और जो आज का विषय नहीं है, उसे अनद्यतन कहते हैं। भविष्यत् होते हुए जो आज का विषय न हो ऐसे काल में धातु से लुट् लकार हो। इसका तात्पर्य यह है कि आज के भविष्यत् में लुट् होता ही नहीं है। भविता का अर्थ होगा- आने वाले कल या उसके बाद में होने वाला।