भवतेरभ्यासोकारस्य अः स्याल्लिटि।
३९८- भवतेरः। भवतेः षष्ठ्यन्तम्, अः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में व्यथो लिटि से लिटि और अत्र लोपोऽभ्यासस्य से अभ्यासस्य की अनुवृत्ति आ रही है।
भूधातु के अभ्यास के उकार के स्थान पर अकार आदेश होता है, लिट् के परे होने पर।
भू के ऊकार के स्थान पर अकार आदेश होकर भ बन जायेगा।