Premabase · Laghu-siddhānta-kaumudī · Prakaraṇa 12
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VṛttiGovind
LSK 398
अत्वविधायकं विधिसूत्रम्
भवतेरः
Aṣṭādhyāyī 7.4.73
Vṛtti Varadarājācārya

भवतेरभ्यासोकारस्य अः स्याल्लिटि।

Hindi commentary Govind Prasad Sharma · śrīdhara-mukhollāsinī

३९८- भवतेरः। भवतेः षष्ठ्यन्तम्, अः प्रथमान्तं, द्विपदमिदं सूत्रम्। इस सूत्र में व्यथो लिटि से लिटि और अत्र लोपोऽभ्यासस्य से अभ्यासस्य की अनुवृत्ति आ रही है।

भूधातु के अभ्यास के उकार के स्थान पर अकार आदेश होता है, लिट् के परे होने पर।

भू के ऊकार के स्थान पर अकार आदेश होकर भ बन जायेगा।